बांग्लादेश में नई सरकार का गठन होते ही अंतरिम सरकार के मुखिया के तौर पर सत्ता संभाल रहे मोहम्मद यूनुस का कार्यकाल समाप्त हो गया है। अपने डेढ़ साल के कार्यकाल में यूनुस विवादों में घिरे रहे। शहाबुद्दीन ने यह बातें मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार का कार्यकाल पूरा होने और तारिक रहमान के नेतृत्व में बीएनपी की पूर्ण सरकार बनने के बाद कही हैं। मोहम्मद यूनुस ने अगस्त 2024 से फरवरी, 2026 तक बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की अगुवाई की।बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने कालेर कंठो के साथ इंटरव्यू में कहा कि मोहम्मद यूनुस का कार्यकाल उनके लिए मुश्किल वक्त रहा। शेख हसीना के जाने के बाद उनको हटाने की लगातार कोशिश हुई और उनके कोसोवो और कतर के विदेश दौरे तक रोक दिए गए। इस दौरान बांग्लादेश के प्रेसिडेंट को प्रेस रिलीज जारी करने तक की इजाजत नहीं थी।
मुझे पद से हटाने की साजिश रची गई
मोहम्मद शहाबुद्दीन ने कहा, 'यूनुस के डेढ़ वर्ष के दौरान मैं किसी चर्चा में शामिल नहीं हुआ, मेरे खिलाफ तरह-तरह की साजिशें रची जाती रहीं। देश की शांति और व्यवस्था को स्थायी रूप से नष्ट करने और संवैधानिक शून्य पैदा करने के कई प्रयास किए गए। मैं अपने निर्णय पर अडिग था। इसीलिए कोई षड्यंत्र सफल नहीं हुआ।' उन्होंने आगे कहा कि यूनुस के साथ डेढ़ साल का अनुभव अच्छा नहीं कहा जा सकता है। मैंने अपने इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन देखे। मुझे पद से हटाने के कितने प्रयास किए गए लेकिन मैं किसी परिस्थिति में नहीं टूटा। ऐसे में राष्ट्रपति को असंवैधानिक तरीकों से पदच्युत करने के सारे प्रयास हुए विफल रहे। बीएनपी का शीर्ष नेतृत्व मेरे साथ रहा: शहाबुद्दीन ने कहा, 'शेख हसीना के हटने और प्रदर्शनों के दौरान हिंसा के समय में बीएनपी का शीर्ष नेतृत्व मेरे साथ रहा। उन्होंने मेरे संविधान की निरंतरता बनाए रखने के मुद्दे को स्पष्ट रूप से सराहा। मैं विशेष रूप से बीएनपी अध्यक्ष तारिक रहमान के बारे में उत्सुक था। मुझे एहसास हुआ कि वह बहुत ईमानदार रहे। मेरे कठिन समय में बीएनपी का सहयोग शत प्रतिशत था।' बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने आगे कहा, 'यह कहना गलत नहीं होगा कि यूनुस ने मुझे जड़ से उखाड़ फेंकने की कोशिश की। राजनीतिक स्तर पर साजिशें विफल हो गई तो अंतरिम सरकार ने कई दूसरे तरह के कदम इस संबंध में उठाए। मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि अंतरिम सरकार ने एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश को लाकर मुझे असंवैधानिक तरीके से हटाने की साजिश रची।'
मुझे विदेशी दौरों की जानकारी नहीं दी गई
शहाबुद्दीन ने कहा कि मुख्य सलाहकार यूनुस ने अध्यादेश जारी करने में संविधान के किसी प्रावधान का पालन नहीं किया। संविधान यह भी कहता है कि जब सरकार का मुखिया विदेश यात्रा पर जाते हैं तो वहां से लौटने के बाद उन्हें राष्ट्रपति से मिलना चाहिए। उनको बताना चाहिए कि क्या समझौता हुआ और क्या बातें हुईं। उन्होंने मुझे कभी विदेशी दौरे के बारे में नहीं बताया। वे कभी मुझसे मिलने नहीं आए।'राष्ट्रपति ने कहा कि मैं उस प्रक्रिया का सूत्रधार था, जिसके तहत यूनुस सलाहकार बने। अंतरिम सरकार के गठन की प्रक्रिया मेरी पहल पर हुई लेकिन बाद में मुख्य सलाहकार ने मेरे साथ समन्वय नहीं किया। वास्तव में इसका कोई स्पष्टीकरण नहीं है कि ऐसा क्यों हुआ क्योंकि वे मुझसे एक बार भी नहीं मिले। उन्होंने लगभग हर तरह से मुझे राष्ट्रपति भवन तक सीमित करने की कोशिश की। ( बांग्लादेश बोर्डर से अशोक झा की रिपोर्ट )
#बांग्लादेश

दुनियाभर के घुमक्कड़ पत्रकारों का एक मंच है,आप विश्व की तमाम घटनाओं को कवरेज करने वाले खबरनवीसों के अनुभव को पढ़ सकेंगे
https://www.roamingjournalist.com/