केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का सीमांचल दौरा सुरक्षा और विकास के लिहाज से निर्णायक माना जा रहा है। सीमांचल में घुसपैठ, डेमोग्राफिक बदलाव, अवैध गतिविधियों और पलायन जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान इस दौरे के बाद गति पकड़ेगा। बांग्लादेश और नेपाल से सटी भारत की सीमाओं की सुरक्षा एवं इसके प्रबंधन को लेकर विस्तृत चर्चा की।
अमित शाह तीन दिवसीय दौरे पर बुधवार को पूर्णिया एयरपोर्ट पहुंचे। वहां उनका स्वागत केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, गृह मंत्री सम्राट चौधरी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने किया। वहां से वे किशनगंज पहुंचे। किशनगंज जिला परिषद सभागार में दो घंटे तक चली बैठक में बिहार में अनाधिकृत तरीके से प्रवेश करने वाले घुसपैठियों पर प्रभावी रोक लगाने की कार्ययोजना बनाई गई। बिहार के सीमावर्ती इलाके में बीते कुछ दशकों के दौरान हुए जनसांख्यिकीय बदलाव पर भी गहन विचार-विमर्श किया गया। सीमांचल के सड़क नेटवर्क और क्षेत्र में चलायी जा रही विकास योजनाओं की समीक्षा की गई।
केंद्रीय गृहमंत्री लैंड पोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष भी हैं, जो कि सीमा क्षेत्र में सड़क नेटवर्क बनाने और उसे दुरुस्त रखने पर काम करता है। बैठक में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय, बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के अलावा गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी, बीएसएफ, आईटीबीपी एवं एसएसबी के डीजी और आईबी के वरीय पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक के बाद गृह मंत्रालय ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी और फोटो साझा किए हैं।
अवैध आर्थिक गतिविधियों पर नाकेबंदी की बनी योजना
सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय गृहमंत्री के नेतृत्व में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में सीमाई क्षेत्र में चलने वाली अवैध आर्थिक गतिविधियों पर नाकेबंदी की भी योजना बनाई गई। नेपाल की 700 किमी लंबी सीमा का फायदा उठाते हुए राष्ट्रविरोधी तत्व ड्रग्स, सोना व अन्य मादक पदार्थों की तस्करी में संलग्न हैं। इससे भारत सरकार को भारी राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। गृह मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सीमांचल में विकास, सुरक्षा और रोजगार के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति और सामुदायिक सौहार्द बनाए रखना प्राथमिकता होगी।
इस दौरे ने स्पष्ट कर दिया कि सीमांचल न केवल सुरक्षा दृष्टि से, बल्कि सामरिक और आर्थिक दृष्टि से भी केंद्र सरकार की नजर में महत्वपूर्ण है। आगामी हफ्तों में इस दौरे की प्रभावशाली कार्ययोजना से सीमांचल की तस्वीर बदल सकती है और क्षेत्र में स्थायी विकास और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। इसके बाद किशनगंज रात्रि को बंगाल बिहार के नेताओके साथ बैठक की। मतुआ समुदाय पर शाह की स्ट्रैटजी बंगाल में 'दीदी' को देगी टक्कर?
सीमांचल दौरे का एक अहम राजनीतिक संदेश मतुआ समुदाय को लेकर भी माना जा रहा है। मतुआ समुदाय बांग्लादेश से आए शरणार्थियों से जुड़ा रहा है और पश्चिम बंगाल में इसकी बड़ी राजनीतिक भूमिका है। नागरिकता, पहचान और सुरक्षा जैसे मुद्दे इस समुदाय के लिए अहम रहे हैं। अमित शाह का घुसपैठ और डेमोग्राफी पर जोर, साथ ही सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के कदम, मतुआ समुदाय को यह संदेश देने की कोशिश माने जा रहे हैं कि केंद्र सरकार उनकी सुरक्षा और पहचान को लेकर गंभीर है।
बिहार से असम और बंगाल की बिछेगी चुनावी बिसात
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार का सीमांचल अमित शाह के लिए 'लॉन्च पैड' है। इसी साल पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होने हैं और भाजपा की चुनावी कमान खुद अमित शाह संभालेंगे। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह बिहार में अपनाए गए 'बूथ-लेवल मैनेजमेंट और कार्यकर्ता संवाद मॉडल' को बंगाल और असम में लागू करेंगे।पश्चिम बंगाल में भाजपा संगठन को मजबूत करने के लिए अमित शाह बिहार की तर्ज पर संगठनात्मक समीक्षा, रणनीतिक बैठकें और साझा अभियान की तैयारी कर रहे हैं। बिहार में एनडीए के सहयोगियों के साथ जिस तरह संयुक्त प्रचार और बूथ मैनेजमेंट किया गया, उसी मॉडल को बंगाल और असम में दोहराया जाएगा। अमित शाह का यह प्रवास साफ संदेश दे रहा है कि आने वाले 2026 के विधानसभा चुनावों में भाजपा चुनावों में सीमा सुरक्षा, अवैध घुसपैठ, राष्ट्रीय पहचान और विकास को प्रमुख मुद्दा बनाने जा रही है। यानी साफ है बिहार से अमित शाह न सिर्फ सीमाओं की सुरक्षा साध रहे हैं, बल्कि असम और बंगाल की सियासी जमीन भी मजबूत करने में जुट गए हैं।
चिकन नेक की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं: गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार सीमावर्ती जिलों की सुरक्षा के लिए गंभीर है और इसके लिए विस्तृत सुरक्षा योजना बनाई गई है। बैठक में सीमांचल के चार जिलों—किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और कटिहार—में घुसपैठ रोकने और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के तरीकों पर चर्चा की गई। विकास और रोजगार के अवसर को लेकर सीमांचल की चर्चा :
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि सीमांचल के समग्र विकास के लिए अवसंरचना को मजबूत किया जाएगा। लैंड पोर्ट प्रोजेक्ट, सड़क और संपर्क माध्यम, स्वास्थ्य एवं शिक्षा सुविधाओं का विस्तार, रोजगार सृजन और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजना बनाई जाएगी। अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार का लक्ष्य सीमांचल के लोगों को स्थानीय स्तर पर विकास के अवसर उपलब्ध कराना है ताकि पलायन रोका जा सके। इसके अलावा गृह मंत्री ने कहा कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत विकास कार्य ऐसे तरीके से किए जाएंगे कि सीमांचल की आबादी बढ़े और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा भी मजबूत हो। दौरे के दूसरे दिन कल जाएंगे अररिया बोर्डर क्षेत्र का भ्रमण कर करेंगे समीक्षा बैठकें: गृह मंत्री ने बताया कि गुरुवार को वे अररिया जिले में कई कार्यक्रमों में भाग लेंगे और सीमावर्ती सात जिलों के अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। शुक्रवार को उनका पूर्णिया में समापन कार्यक्रम और समीक्षा बैठक होगी, जिसमें स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ पार्टी नेताओं की भागीदारी भी रहेगी। इस तीन दिवसीय दौरे के दौरान अमित शाह का उद्देश्य न केवल सुरक्षा सुनिश्चित करना है, बल्कि सीमांचल के विकास को भी गति देना है। अधिकारियों ने बैठक में कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए योजनाओं और कार्यक्रमों के प्रभाव से स्थानीय लोगों का जीवन स्तर बेहतर होगा और क्षेत्र में रोजगार सृजन के नए अवसर पैदा होंगे।अमित शाह के दौरे ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि केंद्र सरकार सीमांचल में सुरक्षा और विकास दोनों पर पूरी तरह से नजर रखेगी। घुसपैठ, अवैध निर्माण और डेमोग्राफिक बदलाव जैसी संवेदनशील समस्याओं पर कड़ा रुख अपनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसी भी तरह की अनियमित गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेगी और इसके लिए सभी संबंधित एजेंसियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
समीक्षा बैठक के बाद अमित शाह ने अधिकारियों और उपस्थित लोगों से कहा कि सीमांचल का विकास और सुरक्षा देश की सामरिक मजबूती के लिए अहम है। उन्होंने कहा कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम से केवल विकास ही नहीं होगा, बल्कि स्थानीय लोगों में रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य की बेहतर सुविधाएं भी सुनिश्चित होंगी। ( किशनगंज से अशोक झा की रिपोर्ट )
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