-भारत में बांग्लादेश हाई कमीशन के सिक्योरिटी एडवाइजर, ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद हाफिजुर रहमान को मेजर जनरल के उच्च पद और दर्जे के एक पैदल सेना डिवीजन के जीओसी की जिम्मेदारी सौंपी
देश में 13 वें संसदीय चुनाव में निर्णायक जीत हासिल करने वाली तारिक रहमान की लीडरशिप वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की नई कैबिनेट में 70 प्रतिशत नेता व्यवसायी पृष्ठभूमि वाले हैं। बांग्लादेश में नई सरकार के सत्ता संभालते ही सेना के शीर्ष स्तर पर बड़े बदलावों का दौर शुरू हो गया है. रविवार को सेना मुख्यालय ने एक महत्वपूर्ण फेरबदल किया, जिसमें नए चीफ ऑफ जनरल स्टाफ (सीजीएस) की नियुक्ति की गई है।बांग्लादेशी सेना ने नए चीफ ऑफ जनरल स्टाफ (CGS) की नियुक्ति की है. इसके साथ और भी कई अहम बदलाव देखने को मिली है। अहम बात यह भी है कि सेना ने उस शख्स को भी एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है जो कि भारत में बांग्लादेश हाई कमीशन में कार्यरत था। रिपोर्ट के मुताबिक, सेना मुख्यालय ने अहम बदलाव किया है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि लेफ्टिनेंट जनरल एम मैनुर रहमान को सीजीएस के पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे इससे पहले सेना प्रशिक्षण और सिद्धांत कमान के प्रमुख (जनरल ऑफिसर कमांडिंग) के रूप में कार्यरत थे। भारत में बांग्लादेश हाई कमीशन के सिक्योरिटी एडवाइजर, ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद हाफिजुर रहमान को मेजर जनरल के उच्च पद और दर्जे के एक पैदल सेना डिवीजन के जीओसी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें भारत से बुलाया गया है। नई सरकार को लेकर क्या बोले भारतीय उच्चायुक्त ढाका में नियुक्त उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने कहा कि बांग्लादेश की नई सरकार के साथ बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए भारत उत्सुक है।उन्होंने भारत की ओर से ढाका के साथ फिर से सक्रिय रूप से बातचीत को लेकर प्रतिक्रिया दी है। बता दें कि बीएनपी ने चुनाव में दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया था, जिसके बाद तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। उनसे पहले मोहम्मद यूनुस करीब 18 महीनों तक अंतरिम सरकार की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। यूनुस के कार्यकाल के दौरान भारत और बांग्लादेश के संबंध उतार-चढ़ाव भरे रहे। इस दौरान दोनों देशों के संबंध 1971 के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे। ऐसे में हाल ही में बांग्लादेशी सेना में एक बहुत बड़ा फेरबदल कर दिया गया है। टॉप लेवल के जनरल इधर से उधर किए गए हैं और कई नए चेहरों को बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। अभी तक आर्मी के सबसे पावरफुल शख्स सेना प्रमुख वकार उज जमां थे लेकिन अब उनसे 'फ्री हैंड' वाली पावर छीन ली गई है। वकार-उज-जमां से छिनी 'पावर'? : अभी तक बांग्लादेशी सेना के सबसे पावरफुल शख्स जनरल वकार-उज-जमां थे। शेख हसीना के जाने के बाद उन्होंने ही देश की कमान संभाली थी, लेकिन अब उनका 'फ्री हैंड' वाला दौर खत्म हो चुका है। तारिक रहमान ने वकार-उज-जमां के करीबी जनरलों को पदों से हटाकर उन्हें कूटनीतिक भूमिकाओं में देश से बाहर भेज दिया है। जनरल वकार अभी भी सेना प्रमुख तो हैं, लेकिन उनके चारों तरफ अब ऐसे अधिकारियों को तैनात कर दिया गया है जो सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को रिपोर्ट करते हैं। बांग्लादेश में नए चेहरों की 'एंट्री', पुराने धुरंधरों की 'एग्जिट' इस मेगा फेरबदल में टॉप लेवल के जनरल इधर से उधर किए गए हैं। खलीलुर रहमान और मैनूर रहमान जैसे अधिकारियों को बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। जानकारों का कहना है कि तारिक रहमान सेना के भीतर अपनी एक 'प्राइवेट चेन ऑफ कमांड' बनाना चाहते हैं, ताकि भविष्य में अगर सेना तख्तापलट की सोचे भी, तो उनके पास अपने वफादार कमांडर्स मौजूद हों।
दिल्ली में तैनात रहे ब्रिगेडियर जनरल हफीजुर रहमान को मेजर जनरल बनाकर बड़ी डिवीजन सौंपना भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इन बड़े अफसरों की बदली किस्मत
सेना मुख्यालय द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, कई महत्वपूर्ण पदों पर नई नियुक्तियां की गई हैं: लेफ्टिनेंट जनरल मैनूर रहमान: इन्हें सेना का नया चीफ ऑफ जनरल स्टाफ (CGS) बनाया गया है। इससे पहले वे ट्रेनिंग और डॉक्ट्रिन कमांड (ARTDOC) की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।लेफ्टिनेंट जनरल एस एम कमरुल हसन: इन्हें एक बड़ी कूटनीतिक भूमिका दी गई है। अब वे विदेश मंत्रालय के तहत राजदूत बनकर देश से बाहर जाएंगे।
मेजर जनरल मीर मुशफिकुर रहमान: इन्हें आर्म्ड फोर्सेज डिवीजन का नया प्रिंसिपल स्टाफ ऑफिसर (PSO) नियुक्त किया गया है।डिवीजन लेवल पर भी बड़ी उठापटक
सिर्फ हेडक्वार्टर ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर भी कमांडर्स बदले गए हैं: मेजर जनरल फर्डौस हसन: अब ये 24 वीं इन्फैंट्री डिवीजन के नए जीओसी (GOC) होंगे। ब्रिगेडियर जनरल मो. हफीजुर रहमान: दिल्ली में बांग्लादेश हाई कमीशन में तैनात रहे हफीजुर रहमान की लॉटरी लग गई है। उन्हें प्रमोट करके मेजर जनरल बनाया गया है और 55 वीं इन्फैंट्री डिवीजन की कमान सौंपी गई है।लेफ्टिनेंट जनरल एम मैनुर रहमान को नया सीजीएस बनाया गया है, जो इससे पहले सेना प्रशिक्षण और सिद्धांत कमान के प्रमुख थे। यह बदलाव प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार के कार्यभार संभालने के कुछ ही दिनों बाद किए गए हैं। इस फेरबदल का असर देश की प्रमुख सैन्य खुफिया एजेंसी और रणनीतिक कमानों पर भी पड़ा है, जिसे शासन व्यवस्था को नए सिरे से व्यवस्थित करने की कोशिश माना जा रहा है।
भारत में रुके ब्रिगेडियर को मिली तरक्की
इस फेरबदल का एक दिलचस्प पहलू भारत से भी जुड़ा हुआ है। भारत में बांग्लादेश उच्चायोग के रक्षा सलाहकार के रूप में तैनात ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद हाफिजुर रहमान को वापस ढाका बुलाया गया है। उन्हें मेजर जनरल के पद पर पदोन्नत किया गया है और एक पैदल सेना डिवीजन के जीओसी के रूप में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस कदम को बांग्लादेश की नई सैन्य रणनीति और महत्वपूर्ण पदों पर भरोसेमंद अफसरों की तैनाती के रूप में देखा जा रहा है। चुनाव में दो-तिहाई बहुमत मिलने के बाद तारिक रहमान ने 17 फरवरी को शपथ ली थी, जिसके साथ ही मुहम्मद यूनुस के 18 महीने के अंतरिम शासन का अंत हो गया है।
आपसी सहयोग को बढ़ाने पर हुई चर्चा
राजनीतिक और सैन्य बदलावों के बीच भारत और बांग्लादेश के कूटनीतिक रिश्तों में भी जमी बर्फ पिघलती नजर आ रही है। ढाका में नियुक्त भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने रविवार को बांग्लादेश के नए विदेश मंत्री खलीलुर रहमान से मुलाकात की है. इस बैठक के बाद उन्होंने कहा कि भारत, बांग्लादेश की नई सरकार के साथ संवाद को आगे बढ़ाने के लिए काफी उत्सुक है. पिछले कुछ समय में दोनों देशों के रिश्तों में जो गिरावट आई थी, उसे सुधारने के लिए नई दिल्ली अब सक्रिय रूप से बातचीत करना चाहती है. इस बैठक में विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद भी मौजूद थीं, जहां आपसी सहयोग को बढ़ाने पर चर्चा हुई।
नई सरकार के आने से सुधार की उम्मीद
उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने स्पष्ट किया कि भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध परस्पर हित और लाभ के आधार पर मजबूत किए जाएंगे। उन्होंने सकारात्मक और रचनात्मक सोच के साथ हर क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाने की इच्छा जताई है. मुहम्मद यूनुस के कार्यकाल के दौरान दोनों देशों के संबंध ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर पहुंच गए थे, लेकिन अब नई सरकार के आने से सुधार की उम्मीदें बढ़ गई हैं। भारत का संदेश साफ है कि वह पड़ोसी देश के साथ मिलकर विकास और शांति की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है. सैन्य फेरबदल और राजनीतिक संवाद के इस दौर ने पूरे दक्षिण एशिया की नजरें बांग्लादेश की भावी दिशा पर टिका दी हैं।
क्या है इस फेरबदल के पीछे की असली वजह?
अक्सर जब किसी देश में सत्ता बदलती है, तो नई सरकार अपनी सुरक्षा और वफादारी सुनिश्चित करने के लिए सेना में बदलाव करती है. तारिक रहमान के इस कदम को भी इसी नजरिए से देखा जा रहा है। वह चाहते हैं कि सेना के मुख्य पदों पर ऐसे लोग हों जो उनके विजन के साथ चल सकें। ( बांग्लादेश बोर्डर से अशोक झा की रिपोर्ट )
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