पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार (4 फरवरी) दोपहर सुप्रीम कोर्ट में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अदालत में चुनाव आयोग (EC) पर तीखा हमला बोला। वह अपने चुनाव-पूर्व राज्य में मतदाता सूचियों के विवादास्पद विशेष गहन पुनरीक्षण को चुनौती देने के लिए अदालत पहुंची थीं।
शायद देश के इतिहास में पहली बार है जब किसी मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका पर खुद जिरह की। हां, आज सुप्रीम कोर्ट में गहमागहमी कुछ ज्यादा थी। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद एसआईआर पर अपना पक्ष रखने के लिए पेश हुई थीं। उन्होंने कहा कि बंगाल को टारगेट किया जा रहा है। SIR की प्रक्रिया सिर्फ नाम डिलीट करने के लिए इस्तेमाल की जा रही है। इसी दौरान एक मौका ऐसा आया जब चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कुछ ऐसा कहा कि सभी हंस पड़े। सीएम ममता ने भी खुद हाथ जोड़ लिए। दरअसल, कोर्ट में वकीलों की भारी भीड़ थी. ममता अपनी पार्टी के सांसद और वकील कल्याण बनर्जी के साथ एक छोर पर खड़ी थीं। ममता ने विनम्रता के साथ कहा कि क्या मैं एक्सप्लेन कर सकती हूं सर? क्योंकि मैं उस राज्य से ताल्लुक रखती हूं। इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि इस पर किसी को डाउट नहीं होना चाहिए मैडम... यह सुनते ही सभी हंस पड़े। ममता ने आगे कहा कि नो सर, मैं आपकी बहुत आभारी हूं। मैं आपकी दयालुता के लिए आभारी हूं. यह कहते हुए ममता ने हाथ जोड़ लिए. वीडियो में दाहिनी तरफ कोने में देखिए।
सबका आभार जताकर फिर बोलीं ममता
बंगाल की सीएम ने बाकायदे पहले चीफ जस्टिस बाकी दोनों जस्टिस और अपने सामने खड़े वकीलों के प्रति भी आभार व्यक्त किया। ममता ने कहा, सर प्रॉब्लम यह है कि हमारे वकील केस के लिए फाइट करते हैं और वे शुरू से फाइट कर रहे हैं। हम भी...लेकिन जब सब कुछ खत्म कर दिया गया है।।हमें इंसाफ ही नहीं मिल रहा है। दरवाजे के भीतर इंसाफ कराह रहा है... मैं रवींद्र नाथ टैगोर को कोट कर रही हूं तब हमें लगता है कि हमें कहीं भी जस्टिस नहीं मिल रहा है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस की बेंच के सामने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि उन्होंने इलेक्शन कमीशन को 6 बार लेटर लिखे, जिसमें सारी डीटेल दी गई लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.ममता के साथ रहे कल्याण बनर्जी ने क्या बताया : पश्चिम बंगाल SIR मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई को लेकर ममता के साथ मौजूद रहे TMC सांसद और वकील कल्याण बनर्जी ने बाद में पत्रकारों को बताया कि ममता बनर्जी की रिट याचिका पर सुनवाई हुई और ममता बनर्जी ने अपना पक्ष रखा. कुछ मुद्दों पर बहस हुई और कोर्ट ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी, तो उन्हें अपने मामलों पर बहस करने के लिए और समय दिया जाएगा. एक बात महत्वपूर्ण है. याचिका में ही दो महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए हैं, जिन पर विचार करने और फैसला लेने की जरूरत है।ममता बनर्जी ने इस प्रक्रिया को चुनौती देते हुए संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी एक अलग ही अंदाज़ में नजर आईं. ममता बनर्जी के साथ उनकी पूरी कानूनी टीम और वरिष्ठ वकील मौजूद थे. इसके बावजूद उन्होंने कोर्ट से खुद अपनी बात रखने की अनुमति मांगी। "मुझे सिर्फ 10 मिनट दे दीजिए"जैसे ही मामला शुरू हुआ, ममता बनर्जी ने पीठ से निवेदन किया कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से बोलने की इजाजत दी जाए. उन्होंने कहा, "मुझे सिर्फ 10 मिनट दे दीजिए, मैं कुछ तथ्य साफ करना चाहती हूं." इस पर कोर्ट ने यह भी कहा कि उनकी ओर से पहले से अनुभवी वकील मौजूद हैं, लेकिन ममता अपने आग्रह पर अड़ी रहीं। "हमें कहीं इंसाफ नहीं मिल रहा" सुप्रीम कोर्ट में बोलते हुए ममता बनर्जी भावुक हो गईं. उन्होंने कहा, "हमें कहीं इंसाफ नहीं मिल रहा है. जब इंसाफ दरवाजों के पीछे रो रहा हो, तब अदालत ही आखिरी उम्मीद होती है." ममता ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग उनकी शिकायतों को नजरअंदाज कर रहा है। चुनाव आयोग को लिखे 6 पत्र, जवाब शून्य
ममता बनर्जी ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने चुनाव आयोग को छह बार पत्र लिखे, लेकिन एक भी पत्र का जवाब नहीं मिला. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर एक निर्वाचित मुख्यमंत्री की बात नहीं सुनी जा रही, तो आम जनता की शिकायतों का क्या होगा? उनके मुताबिक, SIR प्रक्रिया के जरिए मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की आशंका है, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक साबित हो सकती है.
"ये लड़ाई सिर्फ TMC की नहीं"
ममता बनर्जी ने साफ किया कि यह मामला केवल तृणमूल कांग्रेस या पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं है. उन्होंने कहा, "मैं यह लड़ाई सिर्फ TMC के लिए नहीं लड़ रही हूं, यह देश के लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की लड़ाई है."
SIR प्रक्रिया पर ममता का तीखा हमला
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग द्वारा पश्चिम बंगाल में कराई जा रही Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया पर कड़ा सवाल उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के तहत करीब 58 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं. मुख्यमंत्री का कहना था कि "इन लोगों को न तो अपील का मौका मिला और न ही पूरी जानकारी दी गई." उन्होंने इसे लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ बताया.
"सिर्फ बंगाल को ही क्यों बनाया गया निशाना?"
ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में यह भी सवाल उठाया कि जब देश के अन्य राज्यों में भी चुनाव होने हैं, तो केवल पश्चिम बंगाल में ही इतनी जल्दबाज़ी में SIR क्यों कराई जा रही है. उन्होंने कहा कि 24 साल बाद अचानक तीन महीने में यह प्रक्रिया पूरी करना संदेह पैदा करता है. उनके मुताबिक यह कदम चुनाव से ठीक पहले बंगाल के लोगों के अधिकारों को कमजोर करने जैसा है.
Logical Discrepancy (LD) को लेकर बड़ा आरोप
ममता बनर्जी ने 'Logical Discrepancy (LD)' श्रेणी को लेकर गंभीर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि LD मामलों में नाम काटे ही नहीं जाने चाहिए थे. इसके बावजूद LD से जुड़े लोगों की सूची न तो सार्वजनिक की गई और न ही ऑनलाइन पोर्टल पर डाली गई. ममता ने कहा कि इससे प्रभावित मतदाताओं को अपनी बात रखने का मौका नहीं मिला, जो पूरी प्रक्रिया को अपारदर्शी बनाता है.
माइक्रो ऑब्जर्वर्स पर भी सवाल
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि करीब 8300 माइक्रो ऑब्जर्वर्स तैनात किए गए, जिनमें कई दूसरे राज्यों से थे. उनका आरोप है कि ये अधिकारी दफ्तर में बैठकर नाम काट रहे हैं और लोगों को Form-6 भरने तक की अनुमति नहीं दी गई. उन्होंने यह भी कहा कि कई मामलों में जिंदा लोगों को मृत घोषित कर दिया गया और महिलाओं को खास तौर पर नुकसान उठाना पड़ा.
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने साफ कहा कि "किसी भी हालत में कोई भी वास्तविक मतदाता सूची से बाहर नहीं होना चाहिए." ममता बनर्जी की दलीलों को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया और 9 फरवरी तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया.
सुनवाई के बाद ममता का आभार
सुनवाई के अंत में ममता बनर्जी ने कोर्ट का धन्यवाद करते हुए कहा, "सर, हम आपके बहुत आभारी हैं." अब इस मामले की अगली सुनवाई 9 फरवरी को होगी, जिस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं.
किस बेंच ने की सुनवाई: इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ कर रही है. बेंच में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली भी शामिल हैं. ममता बनर्जी की मौजूदगी को लेकर कोर्ट नंबर-1 में सुरक्षा और व्यवस्था कड़ी रही। सियासी हलकों में हलचल
ममता बनर्जी के इस कदम के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है. विपक्ष इसे राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश बता रहा है, जबकि TMC इसे लोकतंत्र बचाने की लड़ाई करार दे रही है।ममता बनर्जी ने इन मुद्दों पर बहस की
सिर्फ नाम हटाने की प्रक्रिया चल रही है और 4 महीनों से नाम जोड़ने की कोई प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है।
माइक्रो-ऑब्जर्वर और रोल ऑब्जर्वर नियुक्त करने का कोई अधिकार नहीं है. रोल ऑब्जर्वर SDM रैंक के नहीं हैं, वे कोल इंडिया, RBI वगैरह से आ रहे हैं। सभी माइक्रो-ऑब्जर्वर BJP शासित राज्यों से लाए गए हैं और यह तर्क दिया गया कि सिर्फ 2-3 मामलों में (जहां गैर-BJP सरकार है) प्रक्रिया जल्दबाजी में चल रही है लेकिन BJP शासित राज्यों में, प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। कल्याण बनर्जी ने कहा कि जहां तक तार्किक विसंगति की बात है, उन्होंने कहा है कि बहुत छोटी-छोटी गलतियों को भी बहुत गंभीरता से लिया गया है...EC से इन सभी मुद्दों पर ध्यान देने के लिए कहा गया है. कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा है कि वे सुनवाई के लिए समय बढ़ा सकते हैं क्योंकि सिर्फ 4 दिन बचे हैं...कोर्ट ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए सोमवार तक के लिए रखा है और उनसे अपना जवाब देने के लिए कहा है. EC ने एक मुद्दा उठाया कि पश्चिम बंगाल में इतने सारे SDM उपलब्ध नहीं हैं...अब, कोर्ट ने पूछा है कि क्या ग्रेड 2 के अधिकारियों को उनकी मदद के लिए दिया जा सकता है. ममता बनर्जी ने हां कहा है। ( बंगाल से अशोक झा की रिपोर्ट )
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