पश्चिम बंगाल की राजनीति में गुरुवार को हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। ED ने आई-पैक (I-PAC) के ठिकानों पर छापेमारी शुरू की। साल्ट लेक सेक्टर-5 स्थित I-PAC के मुख्य कार्यालय और इसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के लाउडन स्ट्रीट स्थित आवास समेत 4-5 जगहों पर ईडी ने एक साथ धावा बोला। इसके खिलाफ ममता बनर्जी के ऐलान के साथ शाम को पूरे बंगाल में ईडी और भाजपा के खिलाफ धरना
प्रदर्शन किया जाएगा। आईपैक पश्चिम बंगाल में पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म आईपेक टीएमसी को अपनी चुनावी रणनीति के लिए सेवा दे रही है। जब ईडी यानि प्रवर्तन निदेशालय की टीम इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी (आई-पैक) के चीफ प्रतीक जैन के घर और दफ्तर पर रेड मार रही थी, तभी ममता बनर्जी भी यहां उनके आवास आ धमकीं। ममता बनर्जी के यहां पहुंचते ही पारा हाई हो गया। ममता बनर्जी ने ईडी पर आरोप लगाया कि वे तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की गोपनीय फाइलें और डेटा जब्त करने की कोशिश कर रहे हैं। ममता बनर्जी ने इसे राजनीतिक साजिश बताया और कहा कि अगर वह भाजपा की दफ्तर पर रेड मार दें तो? बहरहाल, इस दौरान ममता की गाड़ियों में कुछ फाइलें भी रखवाईं गईं।
दरअसल, ममता बनर्जी ने पहले ईडी पर डॉक्यूमेंट चोरी और टीएमसी की रणनीति की चोरी का आरोप लगाया। ममता बनर्जी प्रतीक जैन के घर से एक फाइल कलेक्ट करके आईपैक दफ्तर पहुंचीं। उसके बाद आईपैक दफ्तर में मौजूद कुछ फाइलों को उठाकर ममता बनर्जी के काफिले की गाड़ी में रखा गया। सूत्रों का कहना है कि जब अंदर छापा चल रहा था, तभी कुछ फाइलें को ममता के अधिकारी ले गए। खुद ममता के हाथ में एक ग्रीन कलर की फाइल देखी गई। आईपैक दफ्तर से जो फाइले निकलीं, वो ग्रीन कलर की थी। अब सवाल है कि आखिर उन फाइल्स में क्या है? क्या उन्हीं फाइल्स के लिए ममता बनर्जी आनन-फानन में पहुंचीं थीं ? अभी तक इसका खुलासा नहीं हो पाया है। अब ईडी जब रेड पर बयान जारी करेगी, तब शायद इसका खुलासा हो। सूत्रों का कहना है कि टीएमसी की आईटी सेल से जुड़े दस्तावेज थे, जो ममता के अधिकारी लेकर गए हैं। उनमें टीएमसी की कुछ जानकारियां थीं। सूत्रों के मुताबिक, ईडी की दिलचस्पी आई पैक के वित्तीय लेनदेन और कुछ संदिग्ध अनुबंधों में है। एजेंसी का दावा है कि उसे कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों और डिजिटल डेटा की तलाश है। वहीं तृणमूल कांग्रेस इसे सीधे तौर पर हस्तक्षेप बता रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जब भी चुनाव नजदीक आते हैं, केंद्र की एजेंसियां बंगाल में सक्रिय हो जाती हैं। इस बीच, भारतीय जनता पार्टी ने ईडी की कार्रवाई को कानून के तहत बताया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि अगर कोई गड़बड़ी नहीं है तो जांच से डर क्यों। पार्टी का दावा है कि तृणमूल कांग्रेस भ्रष्टाचार में डूबी हुई है और अब उसका पर्दाफाश हो रहा है। भाजपा ने यह भी कहा कि ममता बनर्जी जांच से ध्यान हटाने के लिए केंद्र पर हमला कर रही हैं।
हम आपको यह भी बता दें कि इसी सियासी उथलपुथल के बीच भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा दो दिवसीय दौरे पर पश्चिम बंगाल पहुंचे हैं। कोलकाता हवाई अड्डे पर उनका भव्य स्वागत किया गया। नड्डा राज्य इकाई के अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य, केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार और अन्य नेताओं के साथ बैठकों का सिलसिला शुरू कर चुके हैं। पार्टी के अनुसार यह दौरा पूरी तरह आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी पर केंद्रित है। नड्डा जिला अध्यक्षों, विभिन्न विभागों के संयोजकों और प्रवासी कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे। वे पार्टी की कोर टीम के साथ रणनीतिक बैठक भी करेंगे। इसके अलावा वे डॉक्टर्स मीट में भाग लेंगे और स्वास्थ्य से जुड़े संस्थानों का दौरा करेंगे। भाजपा का कहना है कि संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और चुनावी मशीनरी को धार देने के लिए नड्डा का यह दौरा बेहद अहम है।
देखा जाये तो पश्चिम बंगाल की राजनीति अब खुलकर युद्ध के मैदान में बदल चुकी है। ईडी की छापेमारी और उस पर ममता बनर्जी की तीखी प्रतिक्रिया ने साफ कर दिया है कि आने वाला विधानसभा चुनाव सिर्फ मतों का नहीं, बल्कि सत्ता और अस्तित्व की जंग होगा। ममता बनर्जी इसे बंगाल की अस्मिता पर हमला बता रही हैं, तो भाजपा इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के रूप में पेश कर रही है। भाजपा साथ ही पूरी ताकत से बंगाल फतह के मिशन में जुटी हुई है। भाजपा की रणनीति साफ है। भ्रष्टाचार, कुशासन और घुसपैठ जैसे मुद्दों को केंद्र में रखकर ममता सरकार को घेरना। अमित शाह पहले ही इस लाइन को तय कर चुके हैं और अब नड्डा संगठन को उसी दिशा में तेज कर रहे हैं। पार्टी यह मानकर चल रही है कि अगर तृणमूल के भीतर रणनीतिक और प्रबंधकीय ढांचे को झटका दिया जाए, तो उसका चुनावी संतुलन बिगड़ सकता है।
लेकिन यहां भाजपा के लिए भी खतरे कम नहीं हैं। अगर एजेंसियों की कार्रवाई को जनता ने राजनीतिक बदले के रूप में देखा, तो इसका उल्टा असर हो सकता है। बंगाल की राजनीति में भावनाएं बड़ी भूमिका निभाती हैं और ममता बनर्जी इस भावनात्मक खेल की माहिर खिलाड़ी हैं। वह हर हमले को बंगाल बनाम दिल्ली की लड़ाई में बदल देती हैं।
आगामी विधानसभा चुनावों की दृष्टि से यह पूरा घटनाक्रम बेहद निर्णायक है। ईडी की छापेमारी ने चुनावी माहौल को गरमा दिया है। अब मुद्दे सिर्फ विकास या योजनाएं नहीं रहेंगे, बल्कि लोकतंत्र, संघीय ढांचा और राजनीतिक स्वतंत्रता जैसे बड़े सवाल भी बहस के केंद्र में होंगे। भाजपा जहां सत्ता परिवर्तन का सपना देख रही है, वहीं तृणमूल इसे अस्तित्व की लड़ाई बना रही है। ( कोलकाता से अशोक झा की रिपोर्ट )
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