महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार एक दर्दनाक विमान हादसे में शिकार हो गए, जिसमें उनकी मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ जब वे मुंबई में कैबिनेट बैठक में शामिल होने के बाद निजी कंपनी के चार्टर्ड विमान से बारामती के लिए रवाना हुए थे।विमान में सवार अजित पवार समेत सभी 5 लोगों की इस हादसे में जान चली गई है। अजित पवार न केवल एक अनुभवी राजनेता थे, बल्कि महाराष्ट्र की सत्ता के 'चाणक्य' भी माने जाते थे। उनका जाना राज्य की राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति है।बारामती अजीत पवार का गढ़ माना जाता है और वह जिला परिषद चुनावों के प्रचार के लिए वहां जा रहे थे.
कैसा था प्लेन
यह एक प्राइवेट/चार्टर्ड जेट (Lear Jet 45, रजिस्ट्रेशन VT-SSK) था, जो मुंबई से बारामती के लिए उड़ा था. क्रैश लैंडिंग के दौरान रनवे से बाहर निकल गया और आग लग गई.
मृतकों की संख्या
विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार प्लेन में कुल 6 लोग सवार थे (अजित पवार, उनके सुरक्षा कर्मी, पायलट और अन्य स्टाफ). सभी की मौत हो गई. कई प्रमुख न्यूज एजेंसियां ने पुष्टि की है कि अजित पवार सहित सभी 6 लोगों की मौत हो गई. कुछ रिपोर्ट्स में 5 मौतें बताई गईं, लेकिन ज्यादातर में 6 की पुष्टि है, जिसमें अजित पवार भी शामिल हैं.
DGCA (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) के मुताबिक विमान में सवार कोई भी व्यक्ति इस दुर्घटना में जीवित नहीं बचा है. इसमें
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार, 1 PSO और 1 अटेंडेंट और 2 क्रू (PIC+FO) सदस्य विमान में सवार थे। अजित दादा पवार साहेब, मुंबई पीएसओ HC विदीप जाधव, पायलट कॅप्टन सुमित कपूर, कॅप्टन संभवी पाठक, पिंकी माळी, फ्लाईट अटेंडंट, छठा नाम अभी रिपोर्ट्स में जारी नहीं किया गया है।
क्रैश का कारण: शुरुआती जानकारी के अनुसार लैंडिंग के दौरान प्लेन रनवे से उतर गया, क्रैश हुआ और आग लग गई. DGCA ने जांच शुरू कर दी है। मौके पर स्थिति: क्रैश साइट पर विमान के परखच्चे बिखरे हुए थे, आग लगी हुई थी और धुआं उठ रहा था. स्थानीय लोग, पुलिस, फायर ब्रिगेड और राहत टीम तुरंत पहुंची।अस्पताल में सभी को मृत अवस्था में लाया गया। अजित पवार के करीबी सहयोगी किरण गुजर ने अस्पताल से पुष्टि की कि सभी 6 लोग मृत लाए गए। उनके परिवार के सदस्य सुप्रिया सुले, सुनेत्रा पवार, पार्थ पवार दिल्ली से बारामती के लिए रवाना हुए. राजनीतिक हलकों में शोक की लहर है, क्योंकि यह एक बड़ा राजनीतिक झटका है।
अंतिम समय में किसे याद किया था अजीत पवार ने: हादसे से ठीक कुछ ही मिनट पहले अजित पवार ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट (X) पर एक भावनात्मक पोस्ट साझा किया था, जो अब उनका आखिरी सार्वजनिक संदेश बन गया है. उन्होंने अपने पोस्ट में स्वतंत्रता संग्राम के महान नायक लाला लाजपत राय को उनकी जयंती पर याद किया जिनके आज भी भारत में करोड़ों फैन हैं. एनसीपी के दिवंगत नेता ने उन्हें श्रद्धांजलि दी थी. इस संदेश में उन्होंने देशभक्ति और बलिदान की भावना को उजागर करते हुए लाजपत राय के योगदान को याद किया, जिसे उनके समर्थकों और जनता के बीच भावनात्मक रूप से साझा किया जा रहा है।
पोस्ट पर क्या बोले नेटिजन्स: पवार का यह आखिरी पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है और लोग इसे अब उनके जीवन के अंतिम पलों के रूप में देख रहे हैं, जिसमें उन्होंने दिल को छू लेने वाली बात कही थी। यह पोस्ट उनके राजनीतिक करियर और व्यक्तिगत भावनाओं का एक अनमोल हिस्सा बन गया है। सियासी सफर: चाचा की उंगली थामकर बने 'बेताज बादशाह'
अजित पवार का जन्म जुलाई 1959 को अहमदनगर में हुआ था। उन्होंने 1982 में अपने चाचा, दिग्गज नेता शरद पवार के मार्गदर्शन में राजनीति में कदम रखा। बारामती से अपना राजनीतिक सफर शुरू करने वाले 'अजित दादा' ने बहुत जल्द अपनी प्रशासनिक क्षमता और जमीनी पकड़ से पार्टी (NCP) में खुद को स्थापित कर लिया। उनके राजनीतिक करियर की बात करें तो 1991 में पहली बार बारामती से सांसद चुने गए, लेकिन चाचा के लिए सीट खाली कर दी। 1995 से 2024 तक लगातार 7 बार बारामती से विधायक चुने गए। वे अपने करियर में 6 बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री रहे, जो उनकी राजनीतिक अहमियत को दर्शाता है।
फैमिली बैकग्राउंड और शिक्षा
अजित पवार के पिता अनंतराव पवार फिल्म जगत से जुड़े थे और मशहूर वी. शांताराम के स्टूडियो में कार्यरत थे। कॉलेज के दौरान पिता के निधन के बाद अजित पवार ने अपनी पढ़ाई छोड़कर परिवार और खेती-बाड़ी की जिम्मेदारी संभाली, जिसके बाद वे पूरी तरह राजनीति में सक्रिय हो गए। उनका विवाह सुनेत्रा पवार से हुआ और उनके दो बेटे, पार्थ और जय पवार हैं।
2022 में शिंदे गुट के साथ मिलाया हाथ
साल 2022-23 में महाराष्ट्र की सियासत ने तब करवट ली जब अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार से अलग होकर बीजेपी-शिवसेना (शिंदे गुट) के साथ हाथ मिलाया। उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) पर अपना दावा मजबूत किया और चुनाव आयोग ने उनके गुट को असली पार्टी के रूप में मान्यता दी।"अजित पवार की पहचान एक ऐसे नेता के रूप में थी जो काम को समय पर पूरा करने और कड़े फैसले लेने के लिए जाने जाते थे।" ( महाराष्ट्र से अशोक झा की रिपोर्ट )
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