भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा को और मजबूत करते हुए सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) इलाके में 12 फीट ऊंची कंसर्टीना फेंसिंग लगानी शुरू कर दी है। यह कदम पड़ोसी देश बांग्लादेश में जारी राजनीतिक अस्थिरता और कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति के मद्देनज़र उठाया गया है। यह नई सुरक्षा व्यवस्था कूचबिहार, दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार जिलों के संवेदनशील इलाकों में लागू की गई है। यही वह संकरा इलाका है, जिसकी चौड़ाई करीब 20 से 40 किलोमीटर है और जो भारत के मुख्य भू-भाग को आठ पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है. सुरक्षा के लिहाज से यह इलाका बेहद अहम माना जाता है। दार्जिलिंग के सांसद राजू विष्ट ने नई व्यवस्था को करीब से देखा और भारत सरकार के कार्य और बीएसएफ की क्षमता की सराहना की। बढ़ाई ड्रोन निगरानी: BSF ने फेंसिंग के साथ-साथ 24 घंटे गश्त, अतिरिक्त फ्लड लाइट्स, थर्मल कैमरे और ड्रोन निगरानी भी बढ़ा दी है. इसका मकसद घुसपैठ, तस्करी, अवैध प्रवास और बांग्लादेश की अशांति का भारत में असर पड़ने से रोकना है। सूत्रों के मुताबिक, खुफिया एजेंसियों से इनपुट मिले हैं कि बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन और हिंसा के बाद असामाजिक तत्वों और शरणार्थियों की सीमा पार आवाजाही बढ़ सकती है. हालिया झड़पों के चलते हजारों लोग सीमा की ओर बढ़े हैं, जिससे भारत की सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं। BSF अधिकारियों ने इस फेंसिंग को प्रोएक्टिव सुरक्षा कवच बताया है, ताकि इस रणनीतिक और संवेदनशील इलाके की हर हाल में रक्षा की जा सके।
सीमा पार से गंभीर सुरक्षा चिंताएं बढ़ीं: दरअसल, अगस्त 2025 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद बांग्लादेश में पावर वैक्यूम की स्थिति बन गई. इसका फायदा उठाकर बदमाश, कट्टरपंथी तत्वों और शरणार्थियों के सीमा पार आने-जाने की संभावना के बारे में मिली नई खुफिया जानकारी के बाद लिया गया है. सरकार समर्थक और विरोधी गुटों के बीच हालिया हिंसा के कारण पहले ही हजारों लोग सीमा की ओर भाग गए हैं, जिससे भारत के लिए गंभीर सुरक्षा चिंताएं पैदा हो गईं। BSF अधिकारियों ने इस फेंसिंग को इस भू-राजनीतिक रूप से संवेदनशील चोकपॉइंट की सुरक्षा के लिए एक “सक्रिय रक्षात्मक परत” बताया, जो दुश्मनों के लिए रणनीतिक हित का हमेशा से एक लक्ष्य रहा है। ( बांग्लादेश बॉर्डर से अशोक झा की रिपोर्ट )
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