कुतुब मीनार की ऊंचाई कितनी है, यह इनमें से कई को नहीं पता लेकिन वे इतना जानते हैं कि उनका जैतखंब कुतुब मीनार से ऊंचा है। यह सतनामी संप्रदाय के प्रवर्तक गुरु घासीदास की कर्मभूमि गिरौदपुरी धाम में है। गिरौदपुरी छत्तीसगढ़ के बालौदाबाजार जिले में है। जैतखंब के टॉप पर जाने के लिए दो लिफ्ट हैं। ऊपर से सोनाखान का एरिया दिखता है, (देखें वीडियो) जिसके बारे में सर्वे की जानकारी है कि यहां जमीन में सोना है। वीर नारायण सिंह सोनाखान के जमींदार थे, जिन्हें छत्तीसगढ़ का पहला शहीद माना जाता है। ब्रिटिश हुकूमत से टकराने पर उन्हें रायपुर में फांसी दे दी गई थी, जहां आज जय स्तंभ है।
सतनाम को लेकर कई मत हैं। गिरौदपुरी में गुुरु घासीदास के अनुयायी बताते हैं कि जीवन के लिए सात थ्योरी देने के कारण इस संप्रदाय का नाम सतनाम पड़ा। इन सात सिद्धांतों में नशे से दूर रहना और दोपहर में हल नहीं चलाना भी शामिल है। एक मान्यता है कि सत्य (सत) नाम के कारण इस संप्रदाय का नाम सतनाम पड़ा। सतनामी नाम से कई प्रतिष्ठान इस इलाके में हैं।
आज गुरु घासीदास की जयंती है। इनके फॉलोअर लाखों में हैं और भारत के कई राज्यों में फैले हैं। रायपुर से बालौदा बाजार जिला मुख्यालय होते हुए गिरौदपुरी जाने के दौरान रोड किनारे लगे इस संप्रदाय के सफेद झंडे कई जगहों पर दिखते हैं। पिछले साल जैतखंब के विरूपित होने के बाद इस संप्रदाय ने जिला मुख्यालय में हिंसक प्रदर्शन किया था और कलेक्ट्रेट में आगजनी भी हुई थी। ( देश के प्रसिद्ध पत्रकार नवीन कृष्ण की कलम से )
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