देश के पूर्व सांसद और सुविख्यात संत डॉ. रामविलास वेदांती (वेदांती जी महाराज) का निधन हो गया है। उनके निधन से संत समाज और राजनीति जगत में शोक की लहर व्याप्त है।वे 75 साल के थे. रविवार को स्वास्थ्य खराब होने के चलते उन्हें रीवा के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उन्हें एयर लिफ्ट कर भोपाल शिफ्ट करना था, लेकिन मौसम खराब होने के चलते उन्हें शिफ्ट नहीं किया जा सका और उनका निधन हो गया.रामविलास वेदांती ने राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख संत के रूप में सालों तक संघर्ष किया। साथ ही अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए दशकों तक तप, त्याग और संघर्ष का मार्ग चुना।
राम मंदिर आंदोलन में डॉ. वेदांती की अहम भूमिका
बता दें कि राम मंदिर आंदोलन में डॉ. रामविलास वेदांती की अहम भूमिका थी।बाबरी ढांचा विध्वंस केस में जिन नेताओं पर मुकदमा चला उनमें डॉ. वेदांती भी शामिल थे। 6 दिसंबर 1992 को सीबीआई की विशेष अदालत ने अपना अंतिम फैसला सुनाते हुए लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, उमा भारती, विनय कटियार और डॉ. वेदांती सहित सभी आरोपियों को बरी कर दिया था।
फैसले से पहले राम विलास वेदान्ती ने कोर्ट में दर्ज कराए अपने बयान में कहा था कि हमने किसी मज्जिद को नहीं मंदिर के खण्डहर को तोड़ा था। वहां केवल और केवल मंदिर था जिसे राजा विक्रमादित्य ने बनवाया था। 'हमको विश्वास है कि मंदिर था, मंदिर है और मंदिर रहेगा। हमने उस ढांचा को तुड़वाया, उस खंडहर को तुड़वाया, इसके लिए हमको गर्व है। हम रामलला के लिए जेल जाने और फांसी चढ़ने को भी तैयार हैं
राम मंदिर जन्मभूमि न्यास के कार्यकारी अध्यक्ष रहे
डॉ राम विलास वेदांती का जन्म 7 अक्टूबर 1958 को हुआ। राम विलास वेदांती राम मंदिर आंदोलन से शुरुआती दौर से जुड़े रहे और 12 वीं लोकसभा के संसद सदस्य रहे। पहली बार प्रतापगढ़ जिले में रामविलास वेदांती ने कमल खिलाया था। वर्ष 1996 में मछली शहर और 1998 में जिले का सांसद चुने जाने के बाद मंदिर आंदोलन को धार देने के कारण उन्हें राम मंदिर जन्मभूमि न्यास के कार्यकारी अध्यक्ष का दायित्व सौंपा गया था। राजा-रजवाड़ों के इर्द-गिर्द घूमने वाली राजनीति में पहली बार प्रतापगढ़ बेल्हा के वोटरों ने भगवान राम के नाम पर संत को अपना जनप्रतिनिधि चुनकर देश के सबसे बड़े सदन में भेजा था। उन्होंने न केवल जनजागरण के माध्यम से रामभक्तों को एकजुट किया, बल्कि न्यायालय में सत्य और आस्था के पक्ष में निर्भीक होकर अपनी गवाही भी दी। उनका जीवन संतत्व, राष्ट्रभक्ति और धर्म के प्रति अटूट समर्पण का उदाहरण रहा।
महज 2 साल की उम्र में हो गया था मां का निधन
राम मंदिर आंदोलन के शुरुआती दौर से सक्रिय रूप से जुड़े रहे डॉ. रामविलास वेदांती का जन्म 7 अक्टूबर 1958 को हुआ था. महज दो साल की उम्र में उनकी माता का निधन हो गया था. 12 साल की उम्र में वह अयोध्या पहुंचे और फिर अध्यात्म की दुनिया की तरफ अपने कदम बढ़ा दिए। उनकी पहचान एक प्रसिद्ध संत और प्रखर वक्ता के रूप में थी। वह राम मंदिर को लेकर अपनी राय बेबाकी रूप में रखते थे।
राम मंदिर आंदोलन में निभाई अहम भूमिका:
1990 में जब अयोध्या का राम मंदिर आंदोलन पूरे देश में अपने चरम पर था तो देशभर से साधु-संत आंदोलन में भाग लेने के लिए अयोध्या पहुंच रहे थे।इन्हीं साधु-संतों में एक प्रमुख चेहरा डॉ. रामविलास दास वेदांती का था. यह भी कहा जाता है कि जब 1992 में अयोध्या में विवादित ढांचे को गिराने के लिए कारसेवक इकट्ठा हुए थे, उस दौरान डॉ. रामविलास वेदांती मंच से कारसेवकों को संबोधित कर रहे थे। अपने भाषण से उन्होंने कारसेवकों में जोश भरा था।
फायर ब्रांड नेता के रूप में रही पहचान
उन्होंने राम मंदिर आंदोलन को धार देने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। हिंदूवादी नेता और फायर ब्रांड नेता के रूप में भी उनकी एक अलग पहचान थी। डॉ. रामविलास वेदांती ने कई बार सार्वजनिक मंचों और मीडिया से बातचीत में साफ कहा था कि जब तक विवादित ढांचे को हटाया नहीं जाता, तब तक भव्य राम मंदिर का निर्माण संभव नहीं था। डॉ. रामविलासवेदांती का कहना था कि अशोक सिंघल, महंत अवैद्यनाथ और रामचंद्र परमहंस जैसे संतों ने जिस राम मंदिर का सपना देखा था, उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साकार करके दिखाया।
2 बार सांसद रहे रामविलास वेदांती:
डॉ. रामविलास वेदांती ने संसद तक भी सफर तय किया. 1996 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने जौनपुर जिले की मछलीशहर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और विजयी हुए. फिर वर्ष 1998 में प्रतापगढ़ लोकसभा सीट से फिर चुनाव लड़ा. इस बार यहां की जनता ने उन्हें प्रचंड समर्थन दिया. लगातार दो लोकसभा चुनाव की जीत राम जन्मभूमि न्यास से उनके सीधे जुड़ाव और मंदिर आंदोलन में उनकी सक्रिय भूमिका का परिणाम मानी गई.
रीवा के हॉस्पिटल में हुआ रामविलास वेदांती का निधन
दरअसल, डॉ. रामविलास वेदांती मध्य प्रदेश के रीवा जिले लालगांव के पास भठवा गांव में कथा सुना रहे थे. कथा 17 दिसंबर तक चलनी थी. भठवा में शनिवार रात सीने में दर्द और घबराहट की वजह से उपचार के लिए रीवा के सुपर स्पेशलिटी में भर्ती कराया गया. रविवार को इलाज के दौरान डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला भी उनका हाल जानने हॉस्पिटल पहुंचे थे. उन्होंने डॉ. रामविलास वेदांती को एयर लिफ्ट कराकर एम्स भोपाल भेजने के दिशा-निर्देश दिए थे, लेकिन मौसम खराब होने के चलते उन्हें शिफ्ट नहीं किया जा सका।
रामविलास वेदांती के अनुयायियों में शोक की लहर
सोमवार सुबह डॉ. रामविलास वेदांती को कार्डियक अरेस्ट आया. डॉक्टरों ने उन्हें वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया. हालांकि इससे पहले उनकी हालत में कुछ सुधार हो पाता, उनका ऑर्गन फेल हो गया और निधन हो गया. उनके निधन की सूचना मिलते ही श्रद्धालुओं, अनुयायियों और रामभक्तों में गहरा दुख व्याप्त हो गया. डॉ. रामविलास वेदांती का जीवन रामभक्ति, धर्म, राष्ट्र और संस्कृति के लिए समर्पित रहा.
16 दिसंबर को अयोध्या में निकाली जाएगी शोभायात्रा
उनके उत्तराधिकारी एवं वशिष्ठ पीठाधीश्वर डॉ. राघवेश दास वेदांती ने जानकारी देते हुए बताया कि पूज्य महाराज जी की शोभायात्रा 16 दिसंबर 2025 को निकाली जाएगी. शोभायात्रा अयोध्या स्थित हिंदू धाम आश्रम से सुबह लगभग 10:30 बजे के बाद प्रारंभ होगी. इसमें देशभर से संत-महात्मा, साधु-संत, रामभक्त, श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक शामिल होंगे. डॉ. रामविलास वेदांती राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख स्तंभ रहे. उन्होंने मंदिर आंदोलन के कठिन दौर में निर्भीक होकर नेतृत्व किया और धर्म व संस्कृति की रक्षा के लिए आजीवन संघर्ष किया।डॉ. राघवेश दास वेदांती ने कहा कि, 'संसद सदस्य रहते हुए भी पूज्य महाराज जी ने सदैव सनातन मूल्यों और राष्ट्रहित की आवाज बुलंद की. उनका जीवन सादगी, त्याग और तपस्या का अनुपम उदाहरण रहा. उनके महाप्रयाण को अयोध्या के धार्मिक इतिहास की अपूरणीय क्षति माना जा रहा है.' संत समाज ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि डॉ. रामविलास वेदांती का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा। ( अशोक झा की रिपोर्ट )
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