दक्षिण एशिया में इस समय बड़ा भू-राजनीतिक बदलाव हो रहा है, और इसके केंद्र में है पाकिस्तान. पाकिस्तान ने एक नया प्रस्ताव पेश किया है, जो क्षेत्रीय गठबंधनों को बदल सकता है, भारत की लंबे समय से बनी क्षेत्रीय बढ़त को चुनौती दे सकता है और दक्षिण एशियाई सहयोग का नक्शा दोबारा खींच सकता है। लेकिन बड़ा सवाल यह है: क्या कोई देश ऐसा समूह जॉइन करने का जोखिम लेगा, जिसमें भारत शामिल न हो और जो अप्रत्यक्ष रूप से भारत का विरोध करता हो? बांग्लादेश के अंदरूनी हालात मानो अपने इतिहास में पीछे की ओर से जा रहे हैं. एक समय में नोबल पुरस्कार पा चुके मोहम्मद यूनुस यहां की अंतरिम सरकार के मुखिया हैं, बावजूद इसके बांग्लादेश में जो हालात हैं, वो जंगलराज जैसे हैं।अब बांग्लादेश के पूर्व खुफिया अधिकारी और राजनयिक अमीनुल हक पोलाश ने पहली बार मुहम्मद यूनुस का असली चेहरा उजागर किया है।पोलाश, शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद देश छोड़कर बाहर रह रहे हैं और उन्होंने ये भी बताया कि उन्हें क्यों देश छोड़ना पड़ा।बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था को लेकर हताश और उदास करने वाली खबर आ रही है. अर्थशास्त्री मोहम्मद यूनुस की अगुआई में चल रहा बांग्लादेश कर्ज के भंयकर जाल में फंस गया है. ये जानकारी किसी विदेश एजेंसी ने नहीं बल्कि बांग्लादेश की सरकार की एजेंसियों ने ही दी है. बांग्लादेश के वित्त मंत्रालय के अनुसार इस साल मार्च तक बांग्लादेश का कुल बकाया कर्ज 19,99,928 करोड़ टका था. इसमें से विदेशी कर्ज 8,41,992 करोड़ टका था. इस दौरान मुल्क में विदेशी निवेश लगभग निल हो गया है। इससे बचने के लिए बीते मई महीने में भारत के खिलाफ जंग में मुंह की पटखनी खाने वाला पाकिस्तान इन दिनों भारत के खिलाफ नई साजिश रच रहा है और इसके लिए वह चीन और बांग्लादेश के साथ मिलकर नई खिचड़ी पका रहा है। दरअसल पाकिस्तान के मंसूबे एशिया में भारत को अलग थलग करने के हैं और वह पूरे जी जान से इसकी कोशिश में है। इसके साथ ही पाकिस्तान दक्षिण एशियाई भू-राजनीति में भारत के लंबे समय से चले आ रहे दबदबे को चुनौती देने की कोशिश भी कर रहा है। पाकिस्तान का प्रस्ताव: हाल ही में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने कहा है कि पाकिस्तान बांग्लादेश और चीन के साथ अपनी त्रिपक्षीय पहल को 'विस्तार' देने पर काम कर रहा है ताकि इसमें अन्य क्षेत्रीय देशों को शामिल किया जा सके। एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले हफ्ते एक कार्यक्रम में इशाक डार ने लंबे समय से निष्क्रिय पड़े दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) की जगह एक नए क्षेत्रीय संगठन का भी प्रस्ताव रखा है। प्रस्ताव रखते हुए इशाक डार ने संकेत दिए हैं कि पाकिस्तान को SAARC के इतर, एक उभरते बहुपक्षीय मंचों के लिए समर्थन प्राप्त है। चीन, बांग्लादेश आएंगे साथ? यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने क्षेत्रीय संगठन के नए नक्शे बनाने की कोशिश की है। पाकिस्तान ने चीन के साथ मिलकर जून में भी इसी तरह की कोशिश की थी। इस साल की शुरुआत में पाक, बांग्लादेश और चीन ने समान हितों के क्षेत्रों में आपसी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक त्रिपक्षीय गुट की स्थापित की थी। जून में तीनों देशों ने कुनमिंग में एक बैठक भी की थी।क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ? हालांकि भारत के प्रभाव और काबिलियत को देखते हुए विश्लेषकों का मानना है कि कोई भी देश ऐसे समूह में शामिल होने का जोखिम नहीं उठाएगा जिसमें भारत शामिल ना हो। लाहौर की एकेडमिक राबिया अख्तर के मुताबिक इस स्तर पर पाकिस्तान का प्रस्ताव केवल महत्वाकांक्षी नजर आ रहा है। वहीं नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर शांतनु कुमार सिंह के मुताबिक इस क्षेत्र के कुछ देश, जैसे नेपाल और भूटान, अपनी कई निर्यात जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत पर निर्भर हैं और संकट के समय भारत ने खुद की उपयोगिता भी साबित की है। ( बांग्लादेश बोर्डर से अशोक झा की रिपोर्ट )
#बांग्लादेश
दुनियाभर के घुमक्कड़ पत्रकारों का एक मंच है,आप विश्व की तमाम घटनाओं को कवरेज करने वाले खबरनवीसों के अनुभव को पढ़ सकेंगे
https://www.roamingjournalist.com/