जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने दिल्ली में आयोजित संगठन की जनरल मीटिंग में गुरुवार को सांप्रदायिकता, सरकारी नीतियों और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। मदनी ने मुसलमानों के सामने मौजूद चुनौतियों का जिक्र करते हुए सरकार और सांप्रदायिक ताकतों पर निशाना साधा। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के हालिया प्रस्तावों की तारीफ की। जमीयत की बैठक को संबोधित करते हुए मदनी ने कहा कि मेरी मोहन भागवत से डेढ़ घंटे तक बात हुई। मैंने कहा कि हम जिस तरह रहते आए हैं हमको उस तरह रहने दिया जाए. हमको खुशी है कि आरएसएस को यह अहसास हुआ है कि मुसलमानों को करीब करना होगा।
अरशद मदनी ने जमकर की RSS की तारीफ:
अरशद मदनी ने कहा कि अगर आरएसएस देश के भाईचारे के लिए खड़ी है तो हमें उम्मीद है कि साम्प्रदायिक ताकतें कमजोर होंगी. जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष ने कहा कि पहले मैं RSS के बुलाने पर उनसे मिला था, लेकिन अब मुझे लगता है कि हमें उनको बुलाकर मिलना चाहिए. RSS हिन्दू और मुसलमानों को एक करना चाहती है. हम चाहते है यह सुझाव आगे बढ़े. इसी से देश आगे बढ़ेगा और यही हमारी पुरानी तारीख है। हम RSS के खिलाफ नहीं हैं- मदनी
मदनी ने RSS के 100 साल पूरे होने पर उनके प्रस्ताव की तारीफ की. उन्होंने कहा कि RSS ने अपनी कमेटी में जो प्रस्ताव रखा, वह हमें अच्छा लगा. अगर हिंदू-मुस्लिम के साथ आने की बात हो, तो हम RSS के खिलाफ नहीं हैं. उन्होंने बताया कि 8 साल पहले उनकी मुलाकात RSS प्रमुख मोहन भागवत से हुई थी और उन्होंने यही बात कही थी. उन्होंने कहा कि अगर आगे मौका मिला तो फिर मिलेंगे. काशी और मथुरा के मंदिर विवाद को लेकर मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि इस मामले में हमारा नजरिया 1991 का वर्शिप एक्ट है।
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