हौसला, लगन, मेहनत और खुद पर भरोसा हो तो कोई भी मुश्किल लक्ष्य पाने से रोक नहीं सकती। अपने जीवन को तपस्या बनाकर बेटो को पढ़ाने से लेकर उनके मुकाम तक पहुंचाने वाली इस मां की संघर्ष भरी कहानी किसी के लिए भी प्रेरणादायी साबित हो सकती है।
मैं लक्ष्मी अरोरा यूपी के बस्ती जिले की कंपनी बाग पर रहने के दौरान अभावों के बीच आर्थिक तंगी से जूझते हुए बेटोें को कामयाबी की बुलंदियों पर पहुंचाया। तीन दशक पहले मेरे लिए बस्ती से गोरखपुर या अयोध्याजी जाना बहुत बड़ी बात थी। बेटों को पढ़ाने के बाद जब छोटे बेटे को लंदन की एक बहुत बड़ी कंपनी में नौकरी मिली तो उसके साथ बहू की जिद पर वह इंग्लैंड 2019 में ले गया। जाड़े का मौसम में लंदन में पहली बार लक्ष्मी के लिए सात समंदर पार जाना किसी सपने से कम नहीं था। रोमिंग जर्नलिस्ट संग संघर्ष से लेकर सात समंदर की उड़ान शेयर कर रही लक्ष्मी बताती है जो बेटे मेरे लिए आज लाखों खर्च करने में गुरेज नहीं करते हैं उनके लिए कभी आर्थिक दिक्कतों के कारण उनकी छोटी-छोटी मांग नहीं पूरी करने के दिल याद करते ही आंखों में आंसू आ जाते हैं।
सर्द मौसम में पहली बार लंदन जाने के बाद बेटा जिस इलाके में मकान लिया था, उस इलाके में रहने वाले हिंदुस्तानी लोगों से परिचय कराने में बहू नेहा ने बड़ी भूमिका निभायी। बस्ती शहर के कंपनी बाग से लेकर पक्के चौराहा,पुरानी बस्ती, रेलवे स्टेशन, बड़े वन के साथ बच्चों के स्कूल तक सिमटी दुनिया में लंदन का नाम कभी जुड़ेगा सपने में भी नहीं सोचा था। बेटे-बहू की जिद पर लंदन के लिए पहली बार जहाज में बैठी तो खिड़की से बाहर देखा तो लगा हम सफ़ेद रुई की तरह चारों ओर फैले बादलों के बीच उड़ रहे थे। मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि हम इंग्लैंड पहुँच जायेगी । मैने इंग्लैंड के बारे में लंदन की किताबों में पढ़ा था, अपने बेटे-बहू के मुंह से सुना था और जिसके बहुत से चित्र भी देखे थे, परन्तु जिंदगी के इस प्रेमकथा में यह कभी नहीं सोचा था कि वह खुद एक दिन वहाँ जा पहुँचेगी। बेटे-बहू के प्रेम में बंधकर लंदन आए एक महीने होने वाले हर शनिवार या रविवार को बेटे-बहू कहीं न कहीं घुमाने ले जाते थे। सर्दियों की हल्की धुंध, टेम्स नदी के किनारे जलती स्ट्रीट लाइट्स, और हल्की-हल्की बूंदाबांदी... यही थी लंदन की उस शाम की खूबसूरती बेटे-बहू के साथ पहली बार घूमने निकली। हवाई झूले लंदन आई में बैठने के बाद संघर्ष के पुराने दिन सोचकर आंखों में आ रहे आंसुओं को रोकते हुए आनंद के हिलोरे लेने लगा।
(यूपी में बस्ती जिले की लक्ष्मी अरोरा की कलम से )
लक्ष्मी के लंदन डायरी की इसके पहले की स्टोरी यहां पढ़े https://www.roamingjournalist.com/2025/08/blog-post_735.html
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