कश्मीर में पत्रकारिता का ‘बिकाऊ सच’
July 29, 2011
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इस सार्थक खबर के लिए धन्यवाद| खाना यहां का और गाना वहां का, यह तो इस देश के गद्दारों की पुरानी आदत है|
ReplyDeleteइस सार्थक खबर के लिए ध्न्यवाद , ऐसे लोगों का भारत सरकार दमन क्यों नहीं करती है येह भी एक तरह के आतंकवादी ही है
ReplyDeleteसच कभी बिकाऊ नहीं होता पर जम्मू कश्मीर में झूठ को सच
ReplyDeleteका बाना पहना कर खूबसूरती के साथ प्रस्तुत किया गया जो
देश हित में घातक है .आपने उस झूठ का आवरण उतार कर
सच्चाई को सबके सामने लाने का साहसी प्रयास किया ,ये हर
एक के बस की बात नहीं होती की इतनी निर्भीकता और बेबाकी
के साथ अपने आप को साबित का सके . सदैव शुभकामनाएं !!
सर क्या लगता है जब ऐसा क्या जाय तब क्या करना चाहिए | इसको पढ़ के चुप बैठना भी बेकार है | क्या करे ?
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