- हमला के आरोप में महिलाओं समेत 10 गिरफ्तार, रिमांड पर ले होगी पूछताछ
बांग्लादेश बोर्डर से अशोक झा: मवेशी तस्कर को छुड़ाने के लिए समूह में लोगों ने बीएसएफ की टीम पर हमला किया। इस हमले में BSF के कम से कम तीन जवान गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने जवानों पर हुए इस हिंसक हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है और राज्य पुलिस को उपद्रवियों के खिलाफ त्वरित व सख्त कानूनी कार्रवाई करने का स्पष्ट निर्देश दिया है।
मुख्यमंत्री माणिक साहा ने घटना की निंदा करते हुए पुलिस को त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। पुलिस ने बताया कि सोमवार को आशाबाड़ी सीमा चौकी के पास हुई इस घटना के सिलसिले में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया, सोमवार को आशाबाड़ी में संदिग्ध तस्करी गतिविधियों के आरोप में एक व्यक्ति को हिरासत में लिए जाने के बाद गुस्साए ग्रामीणों के एक समूह ने बीएसएफ जवानों पर हमला कर दिया। इस हमले में कम से कम तीन जवान घायल हो गए। भीड़ ने बीएसएफ के एक वाहन में तोड़फोड़ की और सीमा प्रहरियों से हथियार छीनने की कोशिश भी की।
त्रिपुरा के सिपाहीजाला जिले में भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित आशाबारी में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों पर हुए हमले के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए दस लोगों को अदालत में पेश किया गया। अधिकारियों ने बताया कि अदालत ने सात पुरुष आरोपियों को चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया, जबकि तीन महिलाओं को 10 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि दस आरोपियों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए सिपाहीजाला जिले की विशेष एनडीपीएस अदालत में पेश किया गया। सात पुरुष आरोपियों को आगे की पूछताछ के लिए चार दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया, जबकि तीन महिलाओं को 10 दिन की जेल हिरासत में भेज दिया गया।
अधिकारी ने बताया कि सोमवार को कलमचौरा पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आशाबारी में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास पुरुषों और महिलाओं की भीड़ ने कथित तौर पर लाठियों से हमला किया, जिसमें एक कंपनी कमांडर सहित तीन बीएसएफ जवान गंभीर रूप से घायल हो गए।
अधिकारी के अनुसार, बीएसएफ कर्मियों ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कथित तौर पर अवैध सीमा पार व्यापार में लिप्त कुछ भारतीय और बांग्लादेशी तस्करों को देखा। जवान तुरंत मौके पर पहुंचे और एक भारतीय तस्कर को पकड़ लिया। हालांकि, सीमा बाड़ के दूसरी ओर मौजूद बांग्लादेशी तस्कर भाग निकले। अधिकारी ने बताया कि भारतीय तस्कर भी भागने में कामयाब रहा और उसने कथित तौर पर ग्रामीणों को बताया कि बीएसएफ कर्मियों ने उसके साथ मारपीट की थी।इसके बाद, लगभग 50 पुरुष और महिलाएं मौके पर जमा हो गए, बीएसएफ वाहन को घेर लिया और जवानों पर हमला कर दिया, जिसमें कंपनी कमांडर समेत तीन जवान गंभीर रूप से घायल हो गए। घायल बीएसएफ जवानों को इलाज के लिए सरकारी अस्पताल ले जाया गया।
हमलावरों ने कथित तौर पर एक बीएसएफ जवान से पीएजी (पंप एक्शन गन) राइफल छीन ली और एक बीएसएफ वाहन को क्षतिग्रस्त कर दिया। इस घटना में एक हमलावर भी घायल हो गया। वरिष्ठ बीएसएफ और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रण में कर लिया।
हालांकि, घटना के बाद भी इलाके में तनाव बना रहा। भीड़ ने कथित तौर पर पेड़ काटकर सड़क को अवरुद्ध करने का प्रयास किया ताकि सुरक्षा बलों और आम नागरिकों के वाहनों की आवाजाही को रोका जा सके।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि हमले में कथित तौर पर शामिल दस लोगों को अब तक गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि सोमवार रात को शुरू किया गया गहन तलाशी अभियान शेष आरोपियों को पकड़ने के लिए जारी है।
दरअसल भारत और बांग्लादेश के बीच तकरीबन 4096 किलोमीटर लंबे इंटरनेशनल बॉर्डर पर तस्करी आम है. पश्चिम बंगाल, असम, मेघायल, मिजोरम और त्रिपुरा में कई ऐसे प्वाइंट हैं जो बड़े पैमाने पर स्मगलिंग के मामले सामने आए हैं. BSF से हाईटेक तरीके से इन पर निगरानी तो रखती हैं, मगर घने जंगल, पहाड़, नदियां और घनी आबादी वाले गांवों का फायदा उठाकर स्मगलिंग का ये धंधा चलता रहता है. त्रिपुरा में सोमवार रात सिपाहीजला जिले में बीएसएफ के एक असिस्टेंट कमांडेंट और चार जवानों पर 8 लोगों ने एक साथ हमला किया. यह अटैक बॉक्सनगर के आशाबाड़ी इलाके में हुई जहां बांग्लादेश बॉर्डर है. बीएसएफ ने यहां एक स्मगलिंग ऑपरेशन को रोका था. यह टीम मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर वहां पहुंची थी. घायल जवानों में कुछ के फ्रैक्चर भी हुआ है. इससे पहले भी बॉर्डर पर मवेशियों, नशीले पदार्थों, नकली नोटों और सोने की तस्करी की बात सामने आई है. ऐसे में सवाल ये है कि हाईटेक निगरानी के बावजूद बॉर्डर पर स्मगलिंग का ये सिंडिकेट कैसे काम करता है। बॉर्डर पर बाड़ फिर स्मगलिंग कैसे?: गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक इस साल पेश किए गए बजट में सरकार ने जानकारी दी थी कि बॉर्डर पर 3240 किमी तक बाड़ लगाने का काम पूरा हो गया है. इसी में बताया गया था कि तकरीबन 856 किमी इलाके के हिस्से में बाड़ नहीं है. इसमें एक बड़ा हिस्सा ऐसा है, जहां भौगोलिक चुनौतियों की वजह से बाड़बंदी नहीं की जा सकती. इनमें नदियां, घने जंगल और पहाड़ी इलाके हैं. इसके अलावा सीमा से सटे कुछ गांव हैं जिनकी खेत और बस्तियां बिल्कुल बॉर्डर से सटी हैं. यही इलाके तस्करों के लिए जीवनदान की तरह हैं. जहां बाड़बंदी हो सकती है, उसके लिए बीएसएफ को बंगाल सरकार की ओर से जमीन दी जा चुकी है।बॉर्डर पर तस्करी का कारोबार किसी एक सामान तक सीमित नहीं है. यहां मवेशियों की अवैध आवाजाही लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती रही है. इसके अलावा सोने की तस्करी, नशीले पदार्थ जैसे गांजा, कफ सिरप समेत नकेली भारतीय करेंसी भी बांग्लादेश के रास्ते ही आती जाती रही है. प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो की एक रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि चीनी चावल गेहूं व अन्य सामान की भी बॉर्डर पर खूब तस्करी होती है.
कैसे फला-फूला तस्करी का इतना बड़ा सिंडिकेट
बांग्लादेश बॉर्डर पर तस्करी का ये पूरे खेल की वजह से तगड़ा मुनाफा है. इंडियन एक्सप्रेस की एक 2021 की रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम बंगाल से बांग्लादेश में तस्करी होने वाले मवेशियों के 40 से लेकर 80 हजार रुपये तक दाम मिलते हैं. रॉयटर्स ने दिसंबर 2024 में ही एक रिपोर्ट में ये दावा किया था कि भारत में निर्यात प्रतिबंधों के बावजूद बांग्लादेश में कई खाद्य वस्तुओं की तस्करी की गई. ऐसा इसलिए क्योंकि बांग्लादेश में चावल-गेहूं व अन्य चीजों की कीमतें भारतीय बाजार से कहीं ज्यादा हो गईं थीं. नशीले कफ सिरप के मामले का खुलासा तो हाल ही में हुआ था जब बनारस में नकली कफ सिरप कांड सामने आया था.
तस्करी का सिंडिकेट कैसे काम करता है?
DRI ने 2023 में ऑपरेशन ईस्टर्न गेटवे चलाया था. इसमें बांग्लादेश, त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल में फैले सोने की तस्करी के सिंडिकेट के आठ सदस्यों को पकड़ा गया था. इनसे 24.4 किलो सोना जब्त किया गया था. इसमें सामने आया था कि यह सिंडिकेट पांच स्तरों पर काम करता है. इसका पहला पार्ट मास्टरमाइंड या मुख्य तस्कर होता है जो पूरे नेटवर्क पर कंट्रोल रखता है. इसका दूसरे चरण में एजेंट होते हैं जो बॉर्डर पर दोनों ओर तस्करों से संपर्क बैठाते हैं. इसके बाद ट्रांसपोर्टर और कैरियर का काम शुरू हुआ है।
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