- बंगाल के नंदीग्राम और रेजीनगर पर सबकी नजर,चुनाव के नतीजे तय करेगा बंगाल का आगे का भविष्य
- चुनाव के दिन मुख्यमंत्री का उत्तर बंगाल में रहेगा दौड़ा, कलिंपोंग और दार्जिलिंग में कई कार्यक्रम
अशोक झा/नई दिल्ली: भारत के 4 राज्यों की 6 सीटों (5 विधानसभा और 1 लोकसभा) पर उपचुनाव के लिए मतदान कल यानी 6 अक्टूबर 2026 को होने जा रहा है। चुनाव आयोग की घोषणा के अनुसार सभी सीटों के नतीजे 9 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। ममता के बिना नंदीग्राम में मुकाबला:
इस उपचुनाव की सबसे ज्यादा चर्चा पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम सीट को लेकर है। लंबे समय बाद ऐसा राजनीतिक समीकरण बना है जब ममता बनर्जी राज्य की मुख्यमंत्री, विधायक या उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में नहीं हैं। मई 2026 के विधानसभा चुनाव में TMC को सत्ता गंवानी पड़ी थी और ममता बनर्जी को भी अपनी सीट पर हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर ममता के खुद मैदान में उतरने की चर्चा थी। पहले TMC ने संचिता प्रधान को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन बाद में उन्होंने चुनाव से अपना नाम वापस ले लिया। इसके बाद TMC ने इस सीट पर नया उम्मीदवार नहीं उतारा। कांग्रेस ने यहां मिलन प्रधान को टिकट दिया है, जिन्हें एक पुराने मामले में गिरफ्तारी के बाद फिलहाल जमानत मिली हुई है।
BJP ने दिवंगत नेता के परिवार पर लगाया दांव
नंदीग्राम में BJP ने चंद्रनाथ रथ की मां को उम्मीदवार बनाया है। चंद्रनाथ रथ शुभेंदु अधिकारी के करीबी और उनके पूर्व पीए रहे थे। उनकी 6 मई 2026 को हत्या कर दी गई थी।
नंदीग्राम लंबे समय से बंगाल की राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। 2007 का भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन TMC के राजनीतिक विस्तार में अहम माना जाता है। इसी क्षेत्र से जुड़े आंदोलन ने ममता बनर्जी की पार्टी को 2011 में सत्ता तक पहुंचने में बड़ी राजनीतिक जमीन दी थी।
2021 में ममता बनर्जी ने नंदीग्राम से शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद शुभेंदु अधिकारी BJP में शामिल हो गए और राज्य में ममता के प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों में शामिल हो गए। रेजीनगर में कई दलों के बीच सीधा मुकाबला:
पश्चिम बंगाल की दूसरी सीट रेजीनगर में मुकाबला और भी दिलचस्प है। यहां BJP, कांग्रेस, TMC, CPI(M) और हुमायूं कबीर की जनता उन्नयन पार्टी के उम्मीदवार मैदान में हैं।
रेजीनगर मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्र है। BJP के शंकराव सरकार को छोड़कर प्रमुख दलों के ज्यादातर उम्मीदवार मुस्लिम समुदाय से हैं। कांग्रेस ने मोहम्मद अब्दुल्लाहिल काफी, TMC ने रबीउल आलम चौधरी और AJUP ने गोलाम नबी आजाद को उम्मीदवार बनाया है। गुलाम नबी आजाद, हुमायूं कबीर के बेटे हैं। हुमायूं कबीर ने पुलिस पर अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं को परेशान करने का आरोप लगाया है। उन्होंने चुनाव आयोग से भी शिकायत की। बाद में उन्होंने पुलिस उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए प्रचार से खुद को अलग कर लिया। तमिलनाडु, असम और पुडुचेरी में भी मतदान:
पश्चिम बंगाल के अलावा तमिलनाडु की दो विधानसभा सीटों पर भी उपचुनाव हो रहा है। वहीं पुडुचेरी में एक विधानसभा सीट और असम में एक लोकसभा सीट के लिए मतदान होगा।
इन सभी सीटों पर आज होने वाली वोटिंग के बाद 9 अक्टूबर को मतगणना होगी। उपचुनाव के नतीजे संबंधित दलों के लिए राजनीतिक रूप से अहम माने जा रहे हैं, खासकर पश्चिम बंगाल में जहां नंदीग्राम और रेजीनगर के नतीजे राज्य की बदली हुई सियासी तस्वीर का संकेत दे सकते हैं।
सुरक्षा के व्यापक इंतजाम: बंगाल में 6 अक्टूबर 2026 को होने वाले विधानसभा उप-चुनावों को स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए हैं। चुनाव आयोग और केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार उप-चुनावों के लिए मुख्य सुरक्षा व्यवस्था इस प्रकार है। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की भारी तैनाती: पैरामिलिट्री फोर्सेज की मुस्तैदी: राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और मतदाताओं में सुरक्षा की भावना पैदा करने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की कंपनियों को तैनात किया गया है। विभिन्न बलों की भागीदारी: इन सुरक्षा बलों में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), सीमा सुरक्षा बल (BSF), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और सशस्त्र सीमा बल (SSB) के जवान शामिल हैं। क्षेत्रीय गश्त (Route March): केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान संवेदनशील और सीमावर्ती इलाकों में लगातार फ्लैग मार्च और रूट मार्च कर रहे हैं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना या चुनावी हिंसा को रोका जा सके। मतदान केंद्रों पर 'लक्ष्मण रेखा' और त्रिस्तरीय सुरक्षा
100 मीटर का नो-एंट्री ज़ोन: प्रत्येक मतदान केंद्र के चारों ओर 100 मीटर का एक सुरक्षा घेरा (लक्ष्मण रेखा) बनाया गया है। इस दायरे के भीतर केवल प्राधिकृत व्यक्तियों और वैध मतदाताओं को ही सघन जांच के बाद प्रवेश की अनुमति है। इसका उद्देश्य फर्जी मतदान और बूथ के बाहर अनावश्यक भीड़ को रोकना है। क्विक रिस्पांस टीम (QRT) और फ्लाईट स्क्वैड: मतदान के दौरान त्वरित कार्रवाई के लिए क्विक रिस्पांस टीमों को मुस्तैद रखा गया है। इसके साथ ही संदिग्ध गतिविधियों और अवैध धन या सामग्री की आवाजाही पर रोक लगाने के लिए फ्लाईट स्क्वैड (उड़नदस्ते) चौबीसों घंटे चेकिंग कर रहे हैं। मतगणना केंद्रों पर त्रिस्तरीय सुरक्षा: चुनाव के बाद वोटों की गिनती वाले केंद्रों पर भी सुरक्षा के तीन स्तर (Layered Security) तय किए गए हैं, जिसमें सबसे भीतरी घेरे में CAPF, दूसरे स्तर पर राज्य सशस्त्र पुलिस और बाहरी घेरे में राज्य पुलिस तैनात रहेगी। तकनीकी निगरानी और ऑब्जर्वर: CCTV कैमरों से नज़र: संवेदनशील और अति-संवेदनशील बूथों पर संदिग्धों पर नजर रखने के लिए CCTV कैमरों और वीडियोग्राफी का व्यापक इंतजाम किया गया है। विशेष निरीक्षकों की तैनाती: चुनाव आयोग ने पूरी चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने और कानून-व्यवस्था की पल-पल की रिपोर्ट लेने के लिए जनरल ऑब्जर्वर और विशेष पुलिस ऑब्जर्वर नियुक्त किए हैं। यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने और चुनावी वाहनों की निर्बाध आवाजाही के लिए प्रशासन द्वारा रूट डायवर्जन और विशेष ट्रैफिक प्लान भी लागू किया गया है।
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