- बंगाल, असम और केरल में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए कुल 16 ठिकानों पर छापेमारी
- कई आपत्तिजनक सामग्री बरामद , बढ़ सकता है जांच का दायरा
अशोक झा/ कोलकाता: प्रतिबंधित बांग्लादेशी आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) से जुड़े नेटवर्क और स्लीपर सेल तैयार करने की आशंका के बीच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल के पांच ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई असम में दर्ज अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद से जुड़े एक मामले की जांच के सिलसिले में की गई। राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने मंगलबार को पश्चिम बंगाल, असम और केरल में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए कुल 16 ठिकानों पर छापेमारी की है। यह पूरी कार्रवाई प्रतिबंधित बांग्लादेशी आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिद्दीन बांग्लादेश और उसके शैडो संगठन 'इमाम महमूदुर काफिला' (IMK) के सीमा पार आतंकी नेटवर्क और 'स्लीपर सेल' को ध्वस्त करने के लिए की गई है। पश्चिम बंगाल में कहां-कहां हुई छापेमारी?: केंद्रीय जांच एजेंसी ने पश्चिम बंगाल में मुख्य रूप से 5 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। दक्षिण दिनाजपुर: हरिरामपुर के बंशीहारी ब्लॉक स्थित मुंडेहर गांव में मिजानुर रहमान नाम के एक व्यक्ति के घर पर छापेमारी की गई। पूर्व बर्द्धमान: मंगलकोट के पालीसग्राम में सघन तलाशी ली गई, जहां से एक संदिग्ध को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। दक्षिण 24 परगना: डायमंड हार्बर इलाके में भी एनआईए की टीम ने रेड की। क्या है पूरा मामला और क्यों हुई कार्रवाई?: असम कनेक्शन: यह कार्रवाई असम में दर्ज अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद से जुड़े एक मामले के आधार पर की गई है। हाल ही में असम पुलिस ने JMB के शैडो संगठन IMK के कुछ सदस्यों को गिरफ्तार किया था। इंटरनेट के जरिए कट्टरपंथ: पकड़े गए संदिग्धों से पूछताछ और उनके डिजिटल दस्तावेजों की जांच से पता चला कि यह नेटवर्क सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड ऐप्स के माध्यम से बंगाल और पूर्वोत्तर के स्थानीय युवाओं का 'ब्रेनवॉश' कर उन्हें उग्रपंथ की तरफ धकेल रहा था। स्लीपर सेल का जाल: इस संगठन का मुख्य उद्देश्य भारत (विशेषकर असम, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा) में अवैध घुसपैठ, टेरर फंडिंग और युवाओं को हथियार की ट्रेनिंग देकर एक साइलेंट 'स्लीपर सेल' नेटवर्क तैयार करना था।
जांच में क्या मिला?: एनआईए के मुताबिक, इस व्यापक छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में संदिग्ध दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस (लैपटॉप, मोबाइल) और डिजिटल रिकॉर्ड बरामद किए गए हैं, जो इस गहरी आतंकी साजिश और देश विरोधी प्रोपेगैंडा के पुख्ता सबूत देते हैं। दिसंबर 2025 में शुरू हुआ था मामला: NIA के मुताबिक, इस मामले की शुरुआत 28 दिसंबर 2025 को हुई थी। उस समय असम पुलिस ने असम, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा के अलग-अलग जिलों से 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 30 दिसंबर 2025 को STF पुलिस स्टेशन में केस नंबर 06/2025 दर्ज किया गया। जांच में सामने आया कि कथित तौर पर बांग्लादेश स्थित हैंडलर्स 'Purva Akash' नाम के टेलीग्राम ग्रुप के जरिए ऑनलाइन कट्टरपंथीकरण मॉड्यूल चला रहे थे। इस मामले में 35 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।इस मामले में सुरक्षा एजेंसी पहले ही 11 मुख्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। बताया गया है कि असम में पिछले सप्ताह गिरफ्तार किए गए एक युवक से पूछताछ के दौरान कथित तौर पर जेएमबी से जुड़े संपर्कों के बारे में जानकारी मिली थी। इसके बाद उसके लैपटॉप और अन्य दस्तावेजों की जांच में पश्चिम बंगाल के कुछ युवाओं को इंटरनेट मीडिया के माध्यम से राज्य में कथित जेएमबी मॉड्यूल सक्रिय करने की कोशिश से जुड़े सुराग मिलने का दावा किया गया। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर मंगलवार को विभिन्न स्थानों पर तलाशी ली गई।दक्षिण दिनाजपुर के बंशीहारी में एनआईए की चार सदस्यीय टीम ने पुलिस के साथ कुसकारी मुंदेहार इलाके में मिजानुर रहमान के घर की तलाशी ली। जांच का एक पहलू उनके बेटे मुजीबुर रहमान (26) से भी जुड़ा बताया जा रहा है।
परिवार के अनुसार, मुजीबुर उच्च शिक्षा के साथ संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा की तैयारी कर रहा था और जनवरी तक घर पर था। इसके बाद से उसके बारे में परिवार को जानकारी नहीं होने की बात सामने आई है। हालांकि, उसके लापता होने और एनआईए की जांच के बीच कोई संबंध है या नहीं, इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। जांच एजेंसी कथित ऑनलाइन कट्टरपंथ और युवाओं को प्रभावित करने के प्रयासों की भी पड़ताल कर रही है। तलाशी के दौरान मोबाइल फोन, लैपटॉप, डिजिटल दस्तावेज और अन्य सामग्री की जांच की जा रही है। पश्चिम बंगाल में जेएमबी से जुड़े मामलों की जांच पहले भी होती रही है। मंगलवार को पांच ठिकानों पर हुई तलाशी के बाद अब जांच का दायरा बढ़ सकता है। एनआईए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि असम में गिरफ्तार व्यक्ति से सामने आए कथित संपर्कों का वास्तविक स्वरूप क्या है और क्या उनके बीच किसी संगठित नेटवर्क के प्रमाण मौजूद हैं।
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