- इस पवित्र महीने में पूजा-पाठ, जप, तप और दान-पुण्य का विशेष महत्व
- संयम और अनुशासन का विशेष पर्व होता है यह महीना, पलंग पर सोने से क्यों किया जाता है परहेज
पंडित अशोक झा
हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास, जिसे आम बोलचाल में भादो का महीना भी कहा जाता है, हिंदू वर्ष का छठा महीना माना जाता है। साल 2026 में भाद्रपद मास की शुरुआत 29 अगस्त से हो रही है और ये 26 सितंबर तक रहेगा।धार्मिक दृष्टि से ये महीना बेहद खास माना जाता है, क्योंकि इसी दौरान भगवान श्रीकृष्ण और भगवान गणेश से जुड़े कई बड़े पर्व मनाए जाते हैं। इस पवित्र महीने में पूजा-पाठ, जप, तप और दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है. वहीं, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ कार्यों और खान-पान से दूरी बनाने की भी सलाह दी जाती है।धार्मिक मान्यता है कि भाद्रपद महीने में पलंग पर नहीं सोना चाहिए. इस माह में भूमि पर चटाई बिछाकर सोने का विधान है.
स्वास्थ्य दृष्टि से देखें तो शहद, गुड़, मांस, हरी सब्जी, मूली और बैंगन खाना भाद्रपद में पूरी तरह से वर्जित बताया गया है।
नशीले पदार्थों का सेवन भाद्रपद महीने में भूलकर भी नहीं करना चाहिए।
भाद्रपद महीने में तेल से बनी चीजें नहीं खाना चाहिए। अधिक मसालेदार भोजन करना भी वर्जित है।
असत्य और कड़वे वचन बोलना, धोखा देना, जलन की भावना और क्रोध करना इस माह में पूरी तरह से वर्जित है।
किसी भी तरह के मांगलिक कार्य भादो महीने में नहीं करने चाहिए।
धार्मिक मान्यता के अनुसार भादो महीने में नारियल का तेल उपयोग में लाना मना है। ऐसा करने से संतान सुख में कमी आ सकती है।
भाद्रपद मास में पड़ने वाले प्रमुख त्योहार: भादो के महीने में कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार आते हैं। इनमें श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है, जबकि गणेश चतुर्थी से गणपति महोत्सव की शुरुआत होती है. इसके अलावा कजरी तीज और हरतालिका तीज जैसे व्रत भी इस दौरान रखे जाते हैं. राधाष्टमी और अनंत चतुर्दशी भी भाद्रपद मास के प्रमुख पर्वों में शामिल हैं।
भाद्रपद मास में क्या करना चाहिए?: धार्मिक मान्यता है कि भाद्रपद का महीना भगवान श्रीकृष्ण और भगवान गणेश की आराधना के लिए विशेष होता है। इस दौरान रोजाना पूजा-पाठ करना, मंत्रों का जाप करना और अपनी क्षमता के अनुसार दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है। चूंकि ये महीना चातुर्मास का हिस्सा होता है, इसलिए इस दौरान संयम और अनुशासन का विशेष महत्व बताया गया है।
इन मांगलिक कार्यों से बनाएं दूरी:
भाद्रपद मास चातुर्मास की अवधि में आता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक संस्कारों को करने से बचना चाहिए। हालांकि, किसी भी शुभ कार्य की तिथि तय करने से पहले स्थानीय पंचांग या योग्य विद्वान से सलाह लेना सही माना जाता है।
पलंग पर सोने से क्यों किया जाता है परहेज?
धार्मिक मान्यताओं में भादो के महीने के दौरान ऊंचे पलंग या रस्सियों वाली खाट पर सोने से बचने की बात कही गई है। इस दौरान जमीन पर चटाई या बिस्तर बिछाकर सोने को उत्तम माना जाता है।
भाद्रपद महीने में क्या नहीं खाना चाहिए?
भाद्रपद मास वर्षा ऋतु के दौरान पड़ता है।आयुर्वेदिक और पारंपरिक मान्यताओं के मुताबिक, इस मौसम में पाचन से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए खान-पान में विशेष सावधानी रखने की सलाह दी जाती है। ऐसे में इस दौरान दही, छाछ, पत्तेदार हरी सब्जियां, बैंगन और मूली जैसी कुछ चीजों से परहेज करना चाहिए. वहीं, गुड़ और शहद का सेवन कम करने की सलाह भी दी जाती है।भाद्रपद मास का महत्व
भाद्रपद का महीना भक्ति, संयम और साधना का समय माना जाता है. भगवान कृष्ण और गणेश की पूजा के साथ-साथ इस दौरान जरूरतमंद लोगों की सहायता और दान-पुण्य को भी महत्वपूर्ण माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सच्चे मन से किए गए अच्छे कर्म और पूजा व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिणाम ला सकते हैं।
#भाद्रपद
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