- रेल, सड़क, सीमा सुरक्षा के साथ घुसपैठियों एर होगा चौतरफा प्रहार
- रक्षा विशेषज्ञों के बाद कल गृहमंत्री करेंगे सुरक्षा आर गहन मंथन
- पूर्व केंद्रीय गृहराज्य मंत्री को बंगाल सरकार में उत्तरबंगाल विकास मंत्रालय का सौंपा है जिम्मा
अशोक झा/ सिलीगुड़ी: सिलीगुड़ी कॉरिडोर (जिसे 'चिकन नेक' भी कहा जाता है) से जुड़ी 120 एकड़ जमीन केंद्र सरकार को सौंप दी गई है। उसपर लागतार काम चल रहा है। इससे सीमा सुरक्षा, सैन्य तैयारियों और विकास कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।सौंपे गए सात हिस्सों में से पांच सिलीगुड़ी कॉरिडोर या 'चिकन नेक' से होकर गुज़रते हैं। इसकी सुरक्षा को लेकर हर क्षेत्र में केंद्र सरकार आर पार के मुड़ में है। यह 60 किलोमीटर लंबा एक इलाका है, जो अपनी सबसे संकरी जगह पर महज़ 20-22 किलोमीटर चौड़ा है और नेपाल, भूटान और बांग्लादेश के बीच फंसा हुआ है, जबकि इसके उत्तर में सिक्किम के पार चीन स्थित है. इस कॉरिडोर में किसी भी तरह की रुकावट से आठ पूर्वोत्तर राज्यों के साथ कनेक्टिविटी पर असर पड़ सकता है। सुरक्षा जानकारों ने इस क्षेत्र में ज़्यादा चौड़े और ज्यादा मज़बूत हाईवे की जरूरत पर बार-बार जोर दिया है, खासकर 2017 में चीन के साथ डोकलाम गतिरोध (भारत-भूटान-चीन के मिलन बिंदु पर) और बार-बार होने वाले भूस्खलन को ध्यान में रखते हुए, जिससे अक्सर सिक्किम और पहाड़ी इलाकों से संपर्क टूट जाता है।सिलिगुड़ी कॉरिडोर यानी चिकन नेक के आसपास दो हाई-प्रोफाइल विजिट का रणनीति काफी महत्वपूर्ण है। चीन पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश के जरिये इस इलाके में घुसपैठ की कोशिश में जुटा है।अब अमित शाह पहुंच रहे सिलीगुड़ी । आर्मी चीफ जनरल धीरज सेठ के बाद अब अमित शाह चिकन नेक से जुड़े इलाके के दौरे पर जा रहे हैं। गृहमंत्री अमित शाह 18 जुलाई को सुबह सिलीगुड़ी में BSF की जुमागाछ सीमा चौकी का दौरा कर 18 वीं बटालियन बॉर्डर आउटपोस्ट पर जवानों से बातचीत करेंगे. इस मौके पर BSF के विभिन्न विकास कार्यों का उद्घाटन व शिलान्यास भी करेंगे। दोपहर को 'पश्चिम बंगाल में बॉर्डर से जुड़े मामलों' पर बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इसके बाद वे पश्चिम बंगाल में तीन नए कानूनों के क्रियान्वयन पर समीक्षा बैठक करेंगे और शाम में बंगाल में जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रेशन से जुड़े मामलों पर भी बैठक करेंगे। बॉर्ड इलाके के अमित शाह के दौरे को काफी अहम माना जा रहा है।
भारत के लिए चिकन नेक क्यों है अहम : नेपाल और बांग्लादेश के बीच स्थित यह संकरा भूभाग अपनी सबसे कम चौड़ाई पर 20 किलोमीटर से भी कम है। यही कॉरिडोर भारत के शेष हिस्से को सड़क और रेल मार्ग के जरिए पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाला एकमात्र स्थलीय संपर्क है, इसलिए इसकी सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत अहम मानी जाती है। सिलीगुड़ी कॉरिडोर रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील इलाका है. यह लगभग 60 किलोमीटर लंबा और 22 किलोमीटर चौड़ा एक संकरा भूभाग है, जो नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से घिरा हुआ है. यही रास्ता मुख्य भारत को उत्तर-पूर्वी राज्यों जैसे असम और अरुणाचल प्रदेश से जोड़ता है. इस क्षेत्र में करीब 5 करोड़ लोग रहते हैं और लगभग 95 प्रतिशत व्यापार इसी कॉरिडोर के जरिए होता है।संकरा होने के कारण यह क्षेत्र सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। किसी भी सैन्य तनाव की स्थिति में इस रास्ते को बाधित कर उत्तर-पूर्वी राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से अलग किया जा सकता है। यह इलाका तिब्बत के पास स्थित चुम्बी घाटी के करीब होने के कारण और भी संवेदनशील माना जाता है।
सेना प्रमुख को क्षेत्र में मौजूदा सुरक्षा स्थिति, ऑपरेशनल तैयारियों तथा क्षमता विकास से जुड़ी पहलों की विस्तृत जानकारी दी गई। अब अमित शाह भी उसी इलाके में पहुंच रहे हैं। पीएम तारिक रहमान परंपराओं को दरकिनार करते हुए पहली विदेश यात्रा के तौर पर चीन का चयन किया। बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही ढाका के कर्ताधर्ता चीन को बॉर्डर इलाके में पैर जमाने के लिए जमीन मुहैया करान में जुटे हैं। फिर चाहे वो तीस्ता प्रोजेक्ट हो या लालमोनिरहाट एयरबेस को डेवलप करने की योजना हो, हर जगह चीन को आमंत्रित किया जा रहा है. बांग्लादेश में स्थित लालमोनिरहाट सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी चिकन नेक के करीब है, ऐसे में वहां चीन की मौजूदगी रणनीतिक रूप से न केवल खतरनाक बल्कि चिंताजनक भी है। रिपोर्ट की मानें तो बीजिंग की ओर से यहां विशाल हैंगर बनाया गया है।दूसरी तरफ, भारत पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश में चीन की गतिविधियों पर पैनी नजर बनाए हुए है। संकड़े लैंड कॉरिडोर चिकन नेक की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए कई कदम उठाए जा चुके हैं। इस इलाके की संवेदनशीलता को इस बात से ही समझा जा सकता है कि इंडियन आर्मी चीफ जनरल धीरज सेठ के तुरंत बाद अमित शाह चिकन नेक यानी सिलीगुड़ी की यात्रा पर जा रहे हैं। वहां वे सुरक्षा जायजा लेने के साथ ही BSF के जवानों से भी बातचीत करेंगे। दरअसल, बांग्लादेश सीमा से लगते इलाकों में डेवलपमेंट के नाम पर चीन को पैर जमाने के लिए जमीन मुहैया करा रहा है. चीन की लंबे समय से सिलगुड़ी कॉरिडोर यानी चिकन नेक पर बुरी नजर रही है. ऐसे में बीजिंग का बॉर्डर के करीब आना खतरे की घंटी से कम नहीं है. भारत इस बात को अच्छी तरह से समझता है. यही वजह है कि चिकन नेक और बांग्लादेश बॉर्डर से लगते इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को लगातार मजबूत कर रहा है. सेना प्रमुख ने बुधवार को पश्चिम बंगाल स्थित बेंगडुबी सैन्य स्टेशन का दौरा कर पूर्वी कमान की ऑपरेशनल तैयारियों और क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की. यह सैन्य स्टेशन रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह देश के लिए अत्यंत संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के उत्तरी प्रवेश द्वार पर स्थित है।
100000 करोड़ की डिफेंस डील, क्रूज-बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए तबाही का सामान, दुश्मन फाइटर जेट हो जाएंगे फुस्स:
21वीं सदी में अटैक के साथ ही डिफेंस पावर का होना भी काफी जरूरी है। मौजूदा समय में दुनिया दो जंग से रूबरू है - रूस-यूक्रेन और अमेरिका-ईरान। इन दोनों सशस्त्र संघर्षों ने एक बात को स्पष्ट कर दिया है कि जिस देश के पास जितना फायर-पावर है, वो देश मॉडर्न एज वॉर में उतना ज्यादा शक्तिशाली और प्रभावी है। फाइटर जेट से लेकर ड्रोन और मिसाइल तक का इस्तेमाल किया जा रहा है। पैदल सेना का अभी तक यूज नहीं किया गया है एरियल अटैक के साथ ही एरियल डिफेंस सिस्टम की अहम भूमिका भी सामने आई है। इजरायल या अरब के अन्य देशों के पास यदि एयर डिफेंस सिस्टम नहीं होता तो ईरानी हमले में मौजूदा से कहीं ज्यादा नुकसान होता. ऐसे में इन दोनों जंग से दुनिया भी सीख ले रही है. भारत भी पीछे नहीं है. एयर डिफेंस सिस्टम पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. देश को किसी भी तरह के हवाई हमले से बचाने के लिए सुदर्शन चक्र प्रोजेक्ट लॉन्च किया गया है. यह एक मल्टी-लेयर एयर डिफेंस सिस्टम है. रूसी S-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम इसका अहम हिस्सा है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पूरी दुनिया ने S-400 की क्षमता देखी थी. इसकी उपयोगिता और सीमा पर दुश्मनों को देखते हुए भारत ने S-400 एयर डिफेंस सिस्टम के अतिरिक्त स्क्वाड्रन की खरीद के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है. इस तरह अब भारत के पास S-400 की कुल 10 यूनिट्स हो जाएंगी। चीन और पाकिस्तान की ओर से होने वाले संभावित एरियल स्ट्राइक से प्रभावी तरीके से निपटा जा सकेगा।
भारत ने अपनी मल्टी-लेयर एयर डिफेंस कैपेबिलिटी को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए S-400 ट्रायम्फ (Triumf) एयर डिफेंस सिस्टम की 5 अतिरिक्त स्क्वाड्रन खरीदने को मंजूरी दे दी है. इस फैसले के साथ देश में S-400 स्क्वाड्रन की कुल संख्या बढ़कर 10 हो जाएगी। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह खरीद लगभग 2.38 लाख करोड़ रुपये के व्यापक रक्षा आधुनिकीकरण पैकेज का हिस्सा है, जिसमें केवल S-400 पर ही लगभग 50 हजार करोड़ से 1 लाख करोड़ रुपये तक खर्च होने का अनुमान है। इस पूरी पहल को 'मिशन सुदर्शन चक्र' के तहत भारत की एयर एवं मिसाइल डिफेंस सिस्टम की रीढ़ माना जा रहा है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक में 5 अतिरिक्त S-400 स्क्वाड्रन के लिए Acceptance of Necessity-AoN को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही भारत रूस के बाहर S-400 सिस्टम का सबसे बड़ा ऑपरेटर बनने की दिशा में आगे बढ़ गया है. भारत ने अक्टूबर 2018 में रूस के साथ लगभग 39 हजार करोड़ रुपये का समझौता कर 5 S-400 स्क्वाड्रन खरीदने का फैसला किया था। इनमें से तीन स्क्वाड्रन पहले ही ऑपरेशन में हैं, चौथी स्क्वाड्रन इस वर्ष भारत को मिल चुकी है, जबकि पांचवीं स्क्वाड्रन के वर्ष के अंत तक मिलने की उम्मीद है. नए आदेश के तहत अतिरिक्त 5 स्क्वाड्रन की आपूर्ति वर्ष 2028 से शुरू होकर 2035 तक पूरी होने का अनुमान है।बंगाल सरकार के फैसले से जिन इलाकों में एनएचएआई और एनएचआईडीसीएल को विकास का काम शुरू करने की जिम्मेदारी मिली है, वे हैं एनएच- 312 का 329.6 किलोमीटर हिस्सा (जंगीपुर, उमरपुर, कृष्णानगर, बनगांव और बशीरहाट और भारत-बांग्लादेश सीमा पर घोजाडांगा तक) एनएच-31 में बिहार-पश्चिम बंगाल सीमा से गाजोल तक। एनएच-33 में फरक्का तक। एनएच-10 में पश्चिम बंगाल-सिक्किम बॉर्डर रूट- सेवोक आर्मी कैंटोनमेंट, कोरोनेशन ब्रिज,कलिम्पोंग। भारत-भूटान बॉर्डर तक हासिमारा-जयगांव खंड। बांग्लादेश बॉर्डर तक बारादिघी-मैनागुड़ी-चांगराबांधा रूट।
सिलीगुड़ी-कर्सियांग-दार्जिलिंग हिल रोड। इस प्रोजेक्ट से मालदा और मुर्शिदाबाद के रास्ते बिहार-पश्चिम बंगाल की कनेक्टिविटी भी बढ़ेगी। वहीं नदिया और उत्तर 24 परगना जिलों के रास्ते भी बांग्लादेश सीमा तक आवाजाही आसान होगी।
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