- मुख्यमंत्री ने कहा जिस कुशासन से बंगाल दुनिया में बदनाम हुआ उसे पुनः स्थापित करना है
अशोक झा/ कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा के नवनिर्वाचित विधायकों के लिए शुक्रवार से शुरू हुए दो दिवसीय ओरियंटेशन (प्रबोधन) कार्यक्रम का उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया।इस अवसर पर उन्होंने नव निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने, संसदीय मर्यादा का पालन करने और जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए समर्पित भाव से कार्य करने का आह्वान किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, कोलकाता के न्यू टाउन स्थित कन्वेंशन सेंटर में लोकसभा सचिवालय के 'पार्लियामेंट्री रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसीज़' (PRIDE) और पश्चिम बंगाल विधानसभा द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित पश्चिम बंगाल विधानसभा के सदस्यों के लिए ओरिएंटेशन प्रोग्राम में शामिल हुए।मुख्यमंत्री ने पिछली वामपंथी और तृणमूल सरकारों के कामकाज के तरीके की आलोचना की। उन्होंने कहा, "यहां का प्रशासनिक सिस्टम हमेशा इतना खराब नहीं था। वामपंथियों के 34 साल के कार्यकाल में, सभी फैसले पार्टी ऑफिस से लिए जाते थे, जिससे विधानसभा की कोई भूमिका नहीं रह जाती थी। पिछले पंद्रह सालों में जो हुआ, उसे दोहराने की ज़रूरत नहीं है। मैं आज कड़े शब्दों में बात नहीं करना चाहती, फिर भी हमें कुछ कड़वी सच्चाइयों को मानना होगा। राज्य में एक ऐसा सिस्टम बन गया था जिसमें विपक्षी विधायकों और सांसदों की कोई अहमियत नहीं थी; यहां तक कि पुलिस स्टेशनों के ऑफिसर-इन-चार्ज (OC) और इंस्पेक्टर-इन-चार्ज (IC) भी उनकी बात नहीं मानते थे—हर मामले में सिर्फ़ राजनीतिक जुड़ाव को ही आधार माना जाता था।"विपक्ष की नेता के तौर पर अपने कड़वे अनुभवों को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि उस भूमिका में अपने पांच साल के कार्यकाल के दौरान उन्हें एक भी प्रशासनिक बैठक में नहीं बुलाया गया था। उन्हें पांच बार सस्पेंड किया गया। जिसमें बजट सत्र भी शामिल थे खासकर इसलिए ताकि वे विधानसभा में बोल न सकें। हालांकि, राज्य में सत्ता बदलने के बाद उस "बदले की राजनीति" को खत्म करने का दावा करते हुए उन्होंने कहा, "पिछले डेढ़ महीने में मैंने जो प्रशासनिक बैठकें की हैं, उनमें मैंने विपक्षी विधायकों को चाहे वे किसी भी पार्टी के हों बुलाया है और उनकी शिकायतों और चिंताओं को पूरी गंभीरता से सुना है।" लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने मौजूदा विधानसभा में बड़ी संख्या में नए और युवा चेहरों के चुने जाने का स्वागत करते हुए कुछ खास आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि मौजूदा सदन में 25 से 55 साल की उम्र के 194 विधायक हैं, जिनमें से 181 ने पहली बार सीट जीती है।
नए विधायकों को सलाह देते हुए लोकसभा स्पीकर ने कहा कि पहली बार चुने गए विधायकों को विधानसभा की पिछली कार्यवाही और बहसों का ध्यानपूर्वक अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि अतीत के जाने-माने विधायकों के भाषण देने के तरीके से लगातार सीखने की ज़रूरत है। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि सत्र के दौरान जब भी मौका मिले, विधायकों को सदन में मौजूद रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि भले ही किसी को व्यक्तिगत रूप से बोलने का मौका न मिले, लेकिन वरिष्ठ और अनुभवी सदस्यों को ध्यान से सुनना और उनसे सीखना किसी के भविष्य के राजनीतिक करियर के लिए बहुत ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि हर विधायक को लगातार यह सोचना चाहिए कि वे अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों के लिए और क्या अच्छे काम कर सकते हैं। बंगाल के शानदार इतिहास को याद करते हुए, ओम बिरला ने कहा कि इस पवित्र भूमि ने कभी पूरे देश और दुनिया को राह दिखाई थी। आज के दिन को ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा, "आज पूरा भारत एक बार फिर बंगाल की ओर देख रहा है। बंगाल को इस परीक्षा से सम्मान के साथ निकलना होगा और अपनी समृद्ध विरासत को फिर से हासिल करना होगा।"जन-प्रतिनिधियों को उनके सबसे अहम कर्तव्य की याद दिलाते हुए, स्पीकर ने ज़ोर दिया कि उनके निर्वाचन क्षेत्रों के लोगों के सुख-दुख विधानसभा के ज़रिए सरकार तक पहुँचाए जाने चाहिए। सरकार सहमत हो या असहमत, बात सुने या अनसुनी कर दे, एक विधायक का मुख्य और पवित्र कर्तव्य है कि वह सदन में लोगों की आवाज़ को मज़बूती से उठाए।उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए ओम बिरला ने कहा कि पश्चिम बंगाल की महान विभूतियों ने अध्यात्म, धर्म और संस्कृति के साथ-साथ समाज सुधार तथा देश की आजादी के आंदोलन में ऐतिहासिक योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि 'वंदे मातरम्' के उद्घोष के माध्यम से बंगाल ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा और नई ऊर्जा प्रदान की।लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि प्रत्येक विधायक केवल अपने विधानसभा क्षेत्र का ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य की सामूहिक आकांक्षाओं और उम्मीदों का प्रतिनिधि होता है। इसलिए सभी जनप्रतिनिधियों को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा और संवेदनशीलता के साथ करना चाहिए।
उन्होंने नवनिर्वाचित विधायकों को सलाह दी कि वे वरिष्ठ और अनुभवी सदस्यों के अनुभवों से सीखें, विधानसभा की पुरानी कार्यवाहियों का अध्ययन करें तथा संसदीय परंपराओं और प्रक्रियाओं को गहराई से समझें। नए विधायकों में सीखने और समझने की निरंतर ललक तथा नवाचार की भावना होनी चाहिए।ओम बिरला ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल तकनीक के इस दौर में जनप्रतिनिधियों को स्वयं को लगातार अद्यतन रखना होगा। उन्होंने विधायकों से अधिकतम समय तक सदन की कार्यवाही में उपस्थित रहने और अन्य सदस्यों के विचारों एवं वक्तव्यों को ध्यानपूर्वक सुनने का आग्रह किया, ताकि संसदीय विमर्श की गुणवत्ता और लोकतांत्रिक संवाद को और मजबूत बनाया जा सके।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की समृद्ध विरासत, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की गौरवशाली परंपरा को फिर से समृद्ध बनाने के लिए सभी जनप्रतिनिधियों को मिलकर कार्य करना होगा। साथ ही लोकतांत्रिक संवाद को सशक्त बनाते हुए विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देना होगा।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि बंगाल की आम जनता की अपेक्षाओं को पूरा करना और समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना प्रत्येक विधायक का प्रमुख लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का सपना तभी साकार होगा, जब विकसित बंगाल के निर्माण की दिशा में प्रभावी प्रयास किए जाएंगे।
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