टीएमसी में पैसो को लेकर मचा घमासान, 440 करोड़ नहीं अब 1000 करोड़ निकालना नहीं होगा आसान
जुलाई 11, 2026
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- सात बागी विधायकों के बयान दर्ज, AITC में क्यों पैदा हुआ विवाद?
- चुनाव आयोग से जिसे मिलेगा पार्टी का अधिकार वही होगा पैसे का हकदार
अशोक झा/ कोलकाता: पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) गुट को एक और बड़ा झटका लगा है. बंगाल पुलिस ने शुक्रवार (10 जुलाई 2026) को पार्टी से जुड़े 12 और बैंक खातों को फ्रीज करने का निर्देश जारी किया। अब कुल 15 बैंक खातों में मौजूद करीब 1,000 करोड़ रुपये जांच के दायरे में आ गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन खातों में नेशनल और प्राइवेट बैंकों के अकाउंट शामिल हैं. इनमें से एक बड़े निजी बैंक के तीन खातों में करीब 440 करोड़ रुपये जमा थे, जिन्हें 18 जून को बिधाननगर साइबर पुलिस ने डेबिट-फ्रीज कर दिया था। यह कार्रवाई विधायक रीताब्रत बनर्जी और संदीपन साहा के नेतृत्व वाले बागी गुट की शिकायत के बाद की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पार्टी फंड में मौजूद रकम का एक हिस्सा कथित आपराधिक गतिविधियों से अर्जित किया गया है। सात बागी विधायकों के बयान दर्ज: बिधाननगर पुलिस अब तक रीताब्रत बनर्जी और संदीपन साहा समेत सात बागी विधायकों के बयान दर्ज कर चुकी है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि बागी विधायकों ने किन आधारों पर फंड में कथित आपराधिक आय शामिल होने का दावा किया है। सूत्रों के मुताबिक, पहले फ्रीज किए गए तीन खातों की जांच के दौरान पुलिस को अन्य खातों के लेन-देन की भी जानकारी जुटाने की जरूरत महसूस हुई. इसी वजह से 12 अतिरिक्त बैंक खातों के ट्रांजैक्शन की भी जांच शुरू की गई है। हाई कोर्ट ने क्या कहा?: कलकत्ता हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने गुरुवार को अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया शिकायत व्यापक (ओम्निबस) प्रकृति की प्रतीत होती है और इसमें किसी विशेष वित्तीय लेन-देन का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। अदालत ने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई ठोस सामग्री रिकॉर्ड पर नहीं है, जिसके आधार पर इतनी व्यापक कार्रवाई को उचित ठहराया जा सके। कोर्ट ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस सुब्रत तालुकदार को 30 सितंबर तक स्पेशल ऑफिसर नियुक्त किया है। उन्हें फ्रीज किए गए खातों के बैंकिंग लेन-देन की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। स्पेशल ऑफिसर पार्टी की रोजमर्रा की राजनीतिक गतिविधियों के लिए आवश्यक खर्च की अनुमति दे सकेंगे. हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि जरूरी राजनीतिक खर्च के अलावा किसी भी अन्य बड़े या छोटे खर्च की अनुमति नहीं होगी।
पैसे निकालने के लिए कोर्ट ने तय की प्रक्रिया: अदालत के निर्देश के मुताबिक, पहले फ्रीज किए गए तीन खातों से केवल अधिकृत दो हस्ताक्षरकर्ताओं द्वारा हस्ताक्षरित चेक के जरिए ही राशि निकाली जा सकेगी। ऐसे सभी चेक पहले स्पेशल ऑफिसर के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे। सत्यापन और काउंटर-साइन के बाद ही उन्हें संबंधित बैंक में प्रस्तुत किया जा सकेगा. कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर भविष्य में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) AITC के किसी एक गुट को आधिकारिक मान्यता दे देता है, तो शुक्रवार को जारी यह अंतरिम व्यवस्था बदली जा सकती है।
अगली सुनवाई 21 सितंबर को:हाईकोर्ट ने स्पेशल ऑफिसर को निर्देश दिया है कि वह 21 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई से पहले खातों से हुए सभी स्वीकृत खर्चों की विस्तृत रिपोर्ट अदालत में पेश करें।
AITC में क्यों पैदा हुआ विवाद?: हालिया पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी से करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक मतभेद खुलकर सामने आए। पार्टी दो गुटों में बंट गई। एक ओर ममता बनर्जी का गुट है, जबकि दूसरी ओर विधानसभा में विपक्ष के नेता रीताब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बागी विधायकों का समूह है। इसी राजनीतिक विवाद के बीच निर्वाचन आयोग ने भी AITC में पैदा हुए नेतृत्व विवाद को लेकर दोनों गुटों से उनका पक्ष मांगा है।
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