- मुख्यमंत्री ने अनुग्रह राशि देने की घोषणा, शोक की लहर
- लोगों के मौत का कारण बना मिथेन गैस, राहत बचाव कार्य जारी
अशोक झा/ गंगटोक: सिक्किम के नामची जिले में निर्माणाधीन सुरंग ढहने से कम से कम 20 मजदूरों की मौत हो गई जबकि पांच से अधिक पिछले चौबीस घंटों से फंसे हुए है। पुलिस ओर बचाव कार्य में लगे लोगों ने यह जानकारी दी। सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने एनएचपीसी सुरंग ढहने से मारे गए प्रत्येक मजदूर के परिवार को चार-चार लाख रुपये और घायल व्यक्ति को 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। तमांग ने बताया कि झोलुंगे के समरडुंग में नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (एनएचपीसी) तीस्ता चरण-छह जल विद्युत परियोजना के तहत निर्माणाधीन सुरंग भूस्खलन के कारण ढह गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि सोमवार को एडीआईटी-तीन सुरंग अचानक ढह गई और घटना के वक्त परियोजना अधिकारी और श्रमिकों समेत कुल 25 लोग सुरंग के अंदर फंसे हुए थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुख्यमंत्री से बात करके हालात का जायजा लिया और उन्हें केंद्र सरकार की ओर से हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि देने की भी घोषणा की। नामची की पुलिस अधीक्षक (एसपी) सोनम डी भूटिया ने कहा, "सुरंग के अंदर फंसे 25 लोगों में से 20 की मौत की पुष्टि हो चुकी है।" उन्होंने बताया कि कई एजेंसियों द्वारा चलाए जा रहे बचाव और तलाश अभियान के दौरान 12 लोगों के शव बरामद किए गए हैं। उन्होंने बताया कि सात शवों की पहचान कर ली गई है और अन्य की शिनाख्त के लिए प्रयास जारी है। इससे पहले दिन में, राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर और मुख्यमंत्री ने हालात का जायजा लेने के लिए घटनास्थल का दौरा किया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों से बातचीत की और निर्देश दिया कि घायल कर्मचारियों को चिकित्सीय देखभाल और मदद दिलाने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएं। तमांग ने एक बयान में कहा, ''हादसे में अपनी जान गंवाने वाले कर्मियों के परिवारों के प्रति मैं अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। दुख की इस घड़ी में पूरे राज्य की संवेदनाएं शोक संतप्त परिवारों के साथ है और हम इस मुश्किल घड़ी में मजबूती से उनके साथ खड़े हैं।'' मुख्यमंत्री ने कहा कि वह जारी बचाव अभियान की करीब से निगरानी कर रहे हैं। तमांग ने बताया कि नामची जिला प्रशासन, सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसएसडीएमए), सिक्किम पुलिस, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं और पाकयोंग व सिलीगुड़ी से आए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीम के साथ अन्य एजेंसियां सुरंग के अंदर फंसे शेष श्रमिकों के शव निकालने के लिए लगातार काम कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, ''नामची जिले के समरडुंग, झोलुंगे में एनएचपीसी तीस्ता चरण-छह जल विद्युत परियोजना के तहत निर्माणाधीन सुरंग में हुई दुखद घटना के बाद माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुझसे (फोन पर) बात की और मौजूदा हालात तथा जारी बचाव कार्यों के बारे में जानकारी ली।'' उन्होंने यह भी कहा, ''प्रभावित श्रमिकों और उनके परिवारों के प्रति उनकी चिंता और संवेदना भरे शब्दों के साथ-साथ भारत सरकार की ओर से हरसंभव सहायता का आश्वासन इस कठिन घड़ी में सिक्किम के लोगों के लिए एक बड़ा संबल बना है।'' मुख्यमंत्री ने कहा कि शाह ने उनसे फोन पर बात की और स्थिति की समीक्षा एवं जारी बचाव कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने कहा, ''मैंने उन्हें जारी बचाव कार्यों और एनडीआरएफ तथा अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर राज्य सरकार द्वारा की जा रही कोशिशों के बारे में जानकारी दी।'' तमांग ने कहा कि शाह ने इस घटना पर गहरी चिंता जताई और केंद्र की ओर से हरसंभव मदद का भरोसा दिया। उन्होंने मुश्किल समय में सिक्किम के लोगों के प्रति लगातार समर्थन और चिंता जताने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री का भी धन्यवाद किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने अधिकारियों को हरसंभव मदद करने, बचाव कार्यों में तेजी लाने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि पूरे अभियान के दौरान सुरक्षा के उच्चतम मानकों का सख्ती से पालन किया जाए।उन्होंने बताया कि सुरंग के अंदर गैस होने के कारण बचाव अभियान जटिल हो गया है और फंसे श्रमिकों तक पहुंचने की कोशिश के दौरान कई बचावकर्मियों को चक्कर आए और कुछ बेहोश भी हो गए। अधिकारियों के अनुसार, माना जा रहा है कि गैस का रिसाव भूमिगत परतों या भूस्खलन प्रभावित चट्टानी संरचनाओं से प्राकृतिक रूप से हो रहा है। मुख्य सचिव रवींद्र तेलंग ने पुलिस महानिदेशक अक्षय सचदेवा की मौजूदगी में नामची में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर सुरंग हादसे के बाद जारी खोज एवं बचाव अभियान की प्रगति का जायजा लिया। बैठक में जिला प्रशासन, बचाव एजेंसियों, पश्चिम बंगाल प्रशासन, एनएचपीसी लिमिटेड और सुरंग निर्माण कार्य कर रही पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड के अधिकारी शामिल हुए। मुख्य सचिव ने सभी एजेंसियों को मृत श्रमिकों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। वहीं, सिक्किम विधानसभा ने मंगलवार को मृत श्रमिकों की याद में दो मिनट का मौन रखा गया।
मौत का कारण मीथेन गैस : मीथेन गैस रिसाव ने रेस्क्यू ऑपरेशन को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग से फोन पर बात कर स्थिति का जायजा लिया और केंद्र की पूरी मदद का आश्वासन दिया। इस हादसे ने 1989 रानीगंज कोयला खदान हादसे की यादें ताजा कर दीं। आइए जानते हैं कि कैसे हो गया हादसा?दरअसल, यह हादसा NHPC की तीस्ता स्टेज-VI जलविद्युत परियोजना के अंतर्गत समरडुंग (झोलुंगे) में बन रही एडीआईटी-3 टनल में हुआ। पटेल इंजीनियरिंग कंपनी इस टनल का निर्माण कर रही थी। यह परियोजना ऊर्जा उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन सिक्किम की भूगर्भीय संरचना (जिसमें प्राकृतिक गैस भंडार हो सकते हैं) ने जोखिम बढ़ा दिया। रिपोट्स के मुताबिक, सोमवार दोपहर करीब 3:40 बजे टनल के अंदर (लगभग 1.5 किमी अंदर) मीथेन गैस जमा होने की सूचना मिली। गैस निकालने की कोशिश के दौरान धमाका हुआ, जिससे भूस्खलन हो गया। टनल का मुंह मलबे से बंद हो गया। जिला कलेक्टर अनुपा तामलिंग ने बताया कि शुरू में 27 मजदूर अंदर फंसे होने का अनुमान था, जिसमें पटेल इंजीनियरिंग के 21 और NHPC के 6 कर्मी शामिल थे। हालांकि, सटीक संख्या की पुष्टि रेस्क्यू टीम के अंदर जाने के बाद ही हो पाएगी। सिक्किम में बड़ा हादसा हुआ है. यहां के समरदुंग सुरंग प्रॉजेक्ट में लैंडस्लाइड की वजह से कई मजदूरों की मौत हो गई. दरअसल मलबे की वजह से सुरंग का एंट्री गेट बंद हो गया. तीस्ता स्टेज 6 हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट का हिस्सा इस निर्माणाधीन सुरंग परियोजना में काम कर रहे कई सारे मजदूर फंस गए। रिपोर्ट्स के अनुसार सुरंग के अंदर मीथेन गैस के रिसाव की वजह से मजदूरों की दिक्कत हुई। फंसे लोगों को निकालने के लिए युद्धस्तर पर कोशिश जारी है। यह जानना भी अहम है कि मीथेन गैस क्या है? ये कैसे और कहां बनती है? आखिर यह गैस जानलेवा क्यों बन जाती है?
सिक्किम में हुआ हादसा तो ताजी घटना है। आए दिन सीवर, सेप्टिक टैंक, कोयला खदानों या बंद जगहों में लोगों के अचानक दम घुटने और मौत की दर्दनाक खबरें सामने आती रहती हैं। इन हादसों के पीछे अक्सर जिस गैस का हाथ होता है, उसे केमिस्ट्री की भाषा में मीथेन कहते हैं। CH₄ रासायनिक सूत्र वाली यह एक रंगहीन और गंधहीन गैस है जो वातावरण और इंसान दोनों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। इसको साइलेंट किलर कहा जाता है।
चलिए हम समझाते है मीथेन गैस क्या है?
मीथेन की बात करें तो यह हाइड्रोकार्बन श्रेणी का सबसे सरल कम्पाउंड है। यह एक रंगहीन, गंधहीन और अत्यधिक ज्वलनशील गैस है। प्राकृतिक रूप से मिलने की वजह से इसे कई जगह 'मार्श गैस' भी कहा जाता है क्योंकि यह दलदली इलाकों में बहुतायत से पाई जाती है।
यह कैसे और कहां बनती है?:मीथेन गैस मुख्य रूप से बिना ऑक्सीजन के जैविक पदार्थों के सड़ने या गलने की प्रक्रिया से बनती है। इसको अनएरोबिक डिकम्पोजिशन कहा जाता है।इसके बनने के कुछ मुख्य स्रोत होते हैं।सेप्टिक टैंक और सीवर: घरों के सेप्टिक टैंक और नगर निगम के सीवर में जब मानव मल-मूत्र और कचरा बिना हवा/ऑक्सीजन के जमा रहता है, तो बैक्टीरिया इसे तोड़ते हैं और मीथेन गैस भारी मात्रा में पैदा होती है.
कृषि और पशुपालन: गाय, भैंस जैसे जुगाली करने वाले मवेशियों के पाचन तंत्र में डाइजेस्टिव प्रक्रिया के दौरान मीथेन बनती है. इसके अलावा गीले धान के खेतों में रुका हुआ पानी भी मीथेन उत्सर्जन का बड़ा जरिया है.
कचरे के ढेर: शहरों के बाहर कचरे के बड़े-बड़े पहाड़ों के अंदर दबे जैविक कचरे के सड़ने से लगातार मीथेन निकलती रहती है.
कोयला खदानें और प्राकृतिक गैस: जमीन के अंदर प्राकृतिक गैस के रूप में मीथेन भारी मात्रा में पाई जाती है, जो कोयला खदानों या ड्रिलिंग के समय बाहर निकलती है.
मीथेन जानलेवा क्यों हो जाती है?
मीथेन गैस अपने आप में सीधी जहरीली या टॉक्सिक नहीं होती लेकिन यह दो प्रमुख तरीकों से इंसान के लिए काल बन जाती है.
असफिक्सिया (Asphyxiation): इसका मतलब ऑक्सीजन की चोरी से होता है. मीथेन हवा से हल्की होती है लेकिन जब यह किसी बंद जगह जैसे सेप्टिक टैंक, बंद कुआं या खदान में जमा होती है तो यह वहां मौजूद ऑक्सीजन को बाहर धकेल देती है. जब कोई व्यक्ति बिना किसी सुरक्षा उपकरण के ऐसी जगह उतरता है तो उसे सांस लेने के लिए ऑक्सीजन नहीं मिलती है. ऑक्सीजन का लेवल गिरते ही मस्तिष्क को सिग्नल मिलना बंद हो जाता है, जिससे व्यक्ति कुछ ही सेकंड में बेहोश हो जाता है और कुछ ही मिनटों में दम घुटने से उसकी मृत्यु हो जाती है.
जबरदस्त विस्फोट का खतरा: हवा में मीथेन का केवल 5 से लेकर 15 प्रतिशत तक का मिश्रण होना ही इसे बेहद विस्फोटक बना देता है। सीवर या खदानों में अगर मीथेन जमा हो और वहां एक छोटी सी चिंगारी उठ जाए तो भयानक धमाका हो सकता है। इसमें माचिस जलाना या टॉर्च का स्विच ऑन करना शामिल होता है।
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