- कलकत्ता HC में भारी हंगामा! वकीलों ने ममता बनर्जी के खिलाफ लगाए 'चोर-चोर' के नारे
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के कलकत्ता हाईकोर्ट में वकालत करने को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। पूर्व सीएम अदालत में हिंसा से जुड़े केस में वकालत करने के लिए पहुंची थीं। इस मुद्दे पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल को ममता बनर्जी के पंजीकरण और वकालत की स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी देने का निर्देश दिया है। वे वकील के आउटफिट के साथ में हाईकोर्ट में पेश हुई थीं। दरअसल इस मामले में 14 मई 2026 को लिखे एक पत्र में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रधान सचिव श्रीमंतो सेन ने कहा कि बीसीआई नियम अधिवक्ताओं के लिए पेशेवर आचरण और शिष्टाचार के मानक निर्धारित करते हैं। इसमें सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालयों, अधीनस्थ न्यायालयों, न्यायाधिकरणों और अन्य प्राधिकरणों के समक्ष पेश होने वाले अधिवक्ताओं द्वारा पहने जाने वाले कपड़ों से संबंधित नियमों का भी उल्लेख किया गया है। पत्र में बार काउंलिल ने किन मुद्दों को उठाया
BCI ने गौर किया कि बनर्जी ने 2011 से 2026 तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किय था। बंगाल बार काउंसिल को लिखे पत्र में कहा गया कि उस अवधि के दौरान उनके द्वारा धारित संवैधानिक सार्वजनिक पद को ध्यान में रखते हुए और इस स्तर पर ऐसी उपस्थिति की अनुमति या अन्यथा पर कोई राय व्यक्त किए बिना, बार काउंसिल ऑफ इंडिया को आपके अभिलेखों से उनके नामांकन, अभ्यास, निलंबन और पुनःस्थापन की तथ्यात्मक स्थिति को सत्यापित करने की आवश्यकता है।स्टेट बार काउंसिल से 16 मई से पहले दो दिनों के भीतर जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया है। मांगी गई जानकारियों में बनर्जी का नामांकन नंबर, पश्चिम बंगाल राज्य बार काउंसिल में उनका पंजीकरण और पंजीकरण की तारीख शामिल है। साथ ही यह भी पूछा गया है कि क्या उनका नाम अभी भी राज्य अधिवक्ताओं की सूची में दर्ज है?
‘क्या सीएम रहते हुए ममता ने दी थी जानकारी?’
काउंसिल ने आगे ये भी पूछा कि क्या बनर्जी ने मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान स्वैच्छिक निलंबन, वकालत के निलंबन या वकालत बंद करने की कोई सूचना दी थी। परिषद ने पूछा है कि क्या उन्होंने बाद में वकालत फिर से शुरू करने के लिए आवेदन किया था और क्या राज्य बार काउंसिल द्वारा ऐसे अनुरोध को स्वीकार या दर्ज किया गया था।
ममता बनर्जी के मामलें में मांगे विस्तृत दस्तावेज
बीसीआई ने यह भी पूछा है कि क्या ममता बनर्जी के पक्ष में स्टेट बार काउंसिल के पास कोई प्रैक्टिस सर्टिफिकेट या प्रैक्टिस-स्टेटस रिकॉर्ड उपलब्ध है, और क्या वह वैध, सक्रिय, निलंबित या किसी अन्य स्थिति में है? इस पत्र में आगे यह भी पूछा गया है कि क्या मुख्यमंत्री के रूप में ममता बनर्जी के कार्यकाल के दौरान या उसके बाद वकालत करने के उनके अधिकार से संबंधित कोई रिकॉर्ड, सूचना, संचार, आदेश या प्रविष्टि मौजूद है।।बीसीआई ने निर्देश दिया है कि जानकारी पूरी तरह से समकालीन आधिकारिक अभिलेखों पर आधारित होनी चाहिए। इसमें राज्य रोल, नामांकन रजिस्टर, अभ्यास प्रमाणपत्र अभिलेख, निलंबन या समाप्ति अभिलेख, पुनः आरंभ अभिलेख, आवक प्राप्ति रजिस्टर और संबंधित फाइल नोटिंग शामिल हैं। इसने सभी सहायक दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां भी मांगी हैं और निर्देश दिया है कि मूल अभिलेखों को उनके वर्तमान स्वरूप में संरक्षित रखा जाए।
हाईकोर्ट में ममता-अभिषेक के खिलाफ नारेबाजी
ममता बनर्जी जब हिंसा के मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट में पैरवी के लिए पहुंची तो उस दौरान जमकर नारेबाजी भी हुई। कई वकीलों और आम लोगों ने इस दौरान पूर्व सीएम, उनके भतीजे और डायमंड हार्बर से टीएमसी के लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी का नाम लेकर जमकर नारेबाजी की। इस दौरान स्थिति काफी तनावपूर्ण भी हो गई थी। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी चीफ ममता बनर्जी गुरुवार को पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हुई हिंसा को लेकर दायर एक याचिका के संदर्भ में कलकत्ता हाई कोर्ट में पेश हुईं। इस दौरान उन्होंने भाजपा सरकार पर बंगाल के लोगों की रक्षा करने पर विफल रहने का आरोप लगाया। ( बंगाल से अशोक झा की रिपोर्ट )
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