पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और टीएमसी में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। बीजेपी प्रेसिडेंट नितिन नवीन ने बुधवार को ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने ममता सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हिंदुओं को पूजा पंडाल लगाने के लिए सरकार से अनुमति लेनी पड़ती है, जबकि मुसलमानों को नमाज पढ़ने की पहले से ही अनुमति है। वहीं, उत्तरी बंगाल में एक रैली को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीजेपी को 'बंगाली-विरोधी' बताया। 'पूजा पंडाल लगाने के लिए लेनी पड़ती है परमिशन' बीजेपी प्रेसिडेंट नितिन नवीन ने दावा किया कि नागरिकों को पूजा पंडाल लगाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। उत्तरी 24 परगना स्थित दक्षिणेश्वर काली मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद, उन्होंने दुर्गा पूजा और अन्य धार्मिक गतिविधियों के लिए मिलने वाली अनुमतियों में कथित भेदभाव को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया। उन्होंने कहा कि मुझे यहां मां के दरबार में आशीर्वाद मिला। उन्होंने आगे कहा कि मैंने मां काली से प्रार्थना भी की, क्योंकि इस राज्य में पूजा पंडाल लगाने के लिए हाईकोर्ट से अनुमति लेनी पड़ती है, जबकि नमाज पढ़ने के लिए अनुमति मिल जाती है। उन्होंने कहा कि हमने राज्य को 'सोनार बांग्ला' और 'विकसित बंगाल' बनाने के लिए मां का आशीर्वाद मांगा है।गौरतलब है कि नितिन नवीन का पश्चिम बंगाल दौरा आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी की तैयारियों का हिस्सा है। इससे पहले नितिन नवीन ने पार्टी की तैयारियों को और मजबूत करने के लिए मंगलवार को यहां कई संगठनात्मक और रणनीतिक बैठके की। भाजपा की राज्य इकाई के सूत्रों ने बताया कि मंगलवार से शुरू हुई नवीन की दो दिवसीय बंगाल यात्रा महज एक नियमित संगठनात्मक समीक्षा के लिए नहीं है, बल्कि राज्य में भाजपा की चुनाव प्रचार रणनीति को नया रूप देने के लिए पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा किए जा रहे व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।
भाजपा का 'चक्रव्यूह'
भाजपा सूत्रों ने इसे एक नई 'चक्रव्यूह' रचना के रूप में वर्णित किया है जिसमें बूथ प्रबंधन, विमर्श का निर्माण और सूक्ष्म स्तर पर लामबंदी के पहलु शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक भाजपा अध्यक्ष ने पार्टी की डिजिटल पहुंच, सोशल मीडिया रणनीति और जमीनी स्तर के संगठनात्मक नेटवर्क को मजबूत करने के लिए दिन भर राज्य इकाई के वरिष्ठ नेताओं के साथ कई उच्च स्तरीय बैठकों की अध्यक्षता की। उन्होंने बताया कि नवीन ने चुनाव से पहले अभियान के संदेश को आकार देने के लिए पार्टी के विमर्श और संवाद टीम के साथ भी चर्चा की।
पार्टी नेताओं के मुताबिक नवीन ने राज्य के शीर्ष नेताओं और वरिष्ठ संगठनात्मक पदाधिकारियों के साथ बंद कमरे में बातचीत की। इससे यह संकेत मिलता है कि भाजपा नेतृत्व राज्य में सत्ता हासिल करने के अपने प्रयास में कोई कसर नहीं छोड़ेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा अध्यक्ष का जोर बूथ स्तर के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने, सूक्ष्म स्तर की योजना को और बेहतर बनाने और पार्टी के चुनाव प्रचार में स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता देने पर है।
ममता बनर्जी का बीजेपी पर हमला:
वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी अपनी चुनावी रैली में बीजेपी पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इस बात को लेकर गंभीर चिंताएं हैं कि असली मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इससे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही पहचान और नागरिकता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
'बीजेपी एक बंगाली-विरोधी पार्टी'
सीएम ममता बनर्जी ने मयनागुड़ी में अपनी रैली को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी एक बंगाली-विरोधी पार्टी है, जो दूसरे राज्यों में बंगालियों की पिटाई करती है। उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि आज वे वोट देने का अधिकार छीन रहे हैं, कल वे एनआरसी के जरिए नागरिकता छीन लेंगे। उन्होंने इसी मौके पर सलाह दी कि मैं अपने उम्मीदवारों से कहूंगी कि वे नामांकन दाखिल करते समय अपने साथ वकील ले जाएं, क्योंकि असम में कई नामांकन रद्द कर दिए गए हैं। ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा को याद रखना चाहिए जो शेर जख्मी हो जाता है वह काफी खूंखार हो जाता है। भाजपा को देश से हटाना पड़ेगा नहीं तो यह देश बेच देगा। ( बंगाल से अशोक झा की रिपोर्ट )
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