- असम भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद दिलीप सैकिया की उपस्थिति में भाजपा में शामिल होने की पूरी की प्रक्रिया
असम में एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के तहत असम प्रदेश कांग्रेस पार्टी (एपीसीसी) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा ने रविवार काे औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। भूपेन बोरा की कई राज्य स्तरीय नेताओं के साथ असम भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद दिलीप सैकिया की उपस्थिति में भाजपा में शामिल होने की प्रक्रिया पूरी हुई। प्रदेश भाजपा मुख्यालय अटल बिहारी वाजपेयी भवन में जब भूपेन बोरा ने प्रवेश किया तो मुख्य द्वार पर भूपेन बोरा का स्वागत मंत्री जयंत मल्ल बरुवा, सांसद प्रदान बरुवा और प्रदेश भाजपा के कई वरिष्ठ नेता उपस्थित थे। औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल होने से पहले मीडिया के सामने बोरा ने कहा कि महाभारत के युद्ध से पहले कर्ण की जो स्थिति थी, वही स्थिति कांग्रेस के गौरवशाली असमियों की है। मैं राजीव भवन से बाजपेयी भवन तक सराइघाट के मैदान की तरह भूमिका निभाऊंगा। कांग्रेस में रहने के दौरान मेरा वस्त्र रक्त से रंगा हुआ था। आज वह वस्त्र पहनकर भाजपा के कार्यालय आया हूं। वह रक्त भाजपा के साथ हुए संघर्ष के कारण निकला था। भाजपा उस रक्त का मूल्यांकन करेगी, यही सोचकर वस्त्र पहन रहा हूं।
उल्लेखनीय है कि, बीते शनिवार को भाजपा में शामिल होने की बात उल्लेख करते हुए, भूपेन बोरा ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह निर्णय आसान नहीं है। उन्होंने गंभीर मनोबल के साथ यह निर्णय जनता की सेवा के लिए लिया है।ज्ञात हो कि, भूपेन बोरा असम प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। वह 2006 में बिहपुरिया से असम विधानसभा के लिए चुने गए और 2011 में फिर से चुने गए। वह तरुण गोगोई के मुख्यमंत्री के कार्यकाल के दौरान असम सरकार के प्रवक्ता और संसदीय सचिव थे। 2013 में उन्हें अखिल भारतीय कांग्रेस समिति का सचिव नियुक्त किया गया। 2021 में, उन्हें असम प्रदेश कांग्रेस समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।भूपेन बोरा के भाजपा में शामिल होने से कांग्रेस पार्टी को विधानसभा चुनावों के ऐन मौके पर एक बड़ा आघात लगा है। हालांकि, कांग्रेस यह कहती हुई नजर आ रही है कि भूपेन बोरा के जाने से पार्टी की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन माना जा रहा है कि पहले से कमजोर कांग्रेस पार्टी चुनाव में और कमजोर होगी। भूपेन बोरा ने भी आज कहा है कि जैसे ही कांग्रेस पार्टी के द्वारा उम्मीदवारों के नामों का ऐलान होगा, उसके बाद बड़ी संख्या में कांग्रेस के बड़े नेता भाजपा का दामन थाम लेंगे। इस मौके पर डॉ. संजू बरुवा ने भी भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। डॉ. बरुवा भी कांग्रेस पार्टी का त्याग कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। इस मौके पर अन्य कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने भी भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। नेताओं ने कांग्रेस नेता गौरव गोगोई के कथित पाकिस्तानी संबंधों को लेकर सवाल उठाए थे। भूपेन बोरा असम के मुख्यमंत्री के साथ प्रदेश भाजपा मुख्यालय में आयोजित 'मन की बात' कार्यक्रम में शामिल होंगे।
भूपेन बोरा और संजू बरुआ के साथ ही कई कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने भी भाजपा का दामन थाम लिया है. हाल ही में बोरा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी, जिसके बाद से ही असम की राजनीति में एक बड़े उलटफेर का संकेत मिलने लगा था।3 दशक से कांग्रेस से जुड़े थे बोरा: इस मुलाकात के बाद बोरा ने कांग्रेस नेतृत्व पर तंज कसा था और कहा था कि उन्होंने अमित शाह को भरोसा दिलाया है कि 8 मार्च तक कांग्रेस के कई और कद्दावर नेता भाजपा का दामन थाम लेंगे. उन्होंने प्रियंका गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि वह उनका सम्मान तो करते हैं, लेकिन हाल के दिनों में उनके चेहरे पर मुस्कान गायब थी, जो उनकी चिंता को दर्शाता है।
कांग्रेस से करीब 3 दशक से जुड़े बोरा ने इंटरव्यू में कांग्रेस से इस्तीफे की मुख्य वजह 'अपमान' को बताया था और कहा था कि उन्होंने यह कदम अपने 'आत्मसम्मान की रक्षा' के लिए उठाया है. साथ ही इसी इंटरव्यू में बोरा ने कहा कि कांग्रेस अब सेक्यूलर नहीं रही।असम की राजनीति में बड़ा नाम हैं बोरा:
भूपेन बोरा अनुभवी राजनीतिज्ञ हैं, जो पिछले 32 सालों तक कांग्रेस में रहे और उन्होंने हाल ही में कांग्रेस से किनारा कर लिया था।बोरा ने 2006 से 2016 तक बिहपुरिया सीट का प्रतिनिधित्व किया और असम विधानसभा के दो कार्यकाल पूरे किए. वे 2021 से 2024 तक असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रहे।तरुण गोगोई के कार्यकाल के दौरान वे असम सरकार के संसदीय सचिव और प्रवक्ता रहे. 2013 में उन्हें असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।बोरा नॉर्थ लखीमपुर कॉलेज छात्र संघ के उपाध्यक्ष और डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय स्नातकोत्तर छात्र संघ के महासचिव भी रहे।उनका जन्म 30 अक्टूबर 1970 को लखीमपुर के पोहुमोरा में हुआ था। उन्होंने नॉर्थ लखीमपुर कॉलेज और डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। डिब्रूगढ़ यूनिवर्सिटी में छात्र नेता के रूप में उन्होंने प्रसिद्धि प्राप्त की और छात्रों के बीच अपने विचारों को स्थापित किया, जब भूपेन बोरा डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय में पढ़ रहे थे, तब केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल भी वहीं पढ़ते थे और दोनों ही ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (एएएसयू) के सदस्य थे।भूपेन बोरा एपीसीसी अध्यक्ष थे, तब वे हर मुद्दे पर मुखर रहते थे. बोरा कांग्रेस के उन प्रमुख नेताओं में से एक थे जिन्होंने पार्टी में विभिन्न पदों पर कार्य किया और जब भी पार्टी ने उन्हें कोई भूमिका सौंपी, उन्होंने बिना किसी आपत्ति के उसे स्वीकार किया।इन कांग्रेस नेताओं पर लगाए थे आरोप: एक्सक्लूसिव बातचीत में भूपेन बोरा ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि पार्टी में उनके खिलाफ अभियान चलाया गया. बोरा ने कहा कि रकीबुल हुसैन ने उनके खिलाफ पार्टी में अभियान चलाया और उन्हें हाशिए पर डाल दिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि गौरव गोगोई हमेशा रकीबुल हुसैन का समर्थन करते रहे हैं. साथ ही कहा कि गौरव गोगोई ने हर समिति और हर निर्णय लेने वाली प्रक्रिया में रकीबुल हुसैन को आगे बढ़ाया। (असम से अशोक झा की रिपोर्ट )
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