मुख्यमंत्री पद की दौड़ में गोविंद दास और विश्वजीत सिंह के नाम चल रहा सबसे आगे
करीब एक साल से राष्ट्रपति शासन झेल रहे मणिपुर में अब राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. चार फरवरी को राज्य में नई सरकार का गठन होने की तैयारी है. सरकार गठन से पहले बीजेपी नेतृत्व ने मणिपुर विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग को ऑब्जर्वर नियुक्त किया है।दिल्ली में आज रात बीजेपी दफ्तर में मणिपुर के एनडीए विधायकों की अहम बैठक होगी। इसके बाद कल बीजेपी मुख्यालय में औपचारिक विधायक दल की बैठक बुलाई गई है, जहां नए नेता का चुनाव किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री पद की दौड़ में गोविंद दास और विश्वजीत सिंह के नाम सबसे आगे चल रहे हैं। बताया जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह का समर्थन मिलने के कारण गोविंद दास फिलहाल रेस में बढ़त बनाए हुए हैं। वहीं सामाजिक और जातीय संतुलन साधने के लिए एक कुकी और एक नागा समुदाय से आने वाले विधायक को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की भी चर्चा है।पार्टी के संसदीय बोर्ड ने मणिपुर भाजपा विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए तरुण चुघ को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं मुख्यालय प्रभारी ने एक बयान में बताया कि केंद्रीय नेतृत्व मणिपुर की राजनीतिक स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और सरकार गठन को लेकर आवश्यक प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। हालांकि विधायक दल की बैठक की तारीख अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, मणिपुर से भाजपा और उसके सहयोगी दलों के कई विधायक नई दिल्ली पहुंच चुके हैं। पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह और मणिपुर भाजपा अध्यक्ष शारदा देवी भी विधायकों के साथ मौजूद हैं। भाजपा के वरिष्ठ केंद्रीय नेता इन विधायकों के साथ सोमवार या मंगलवार को अहम बैठक कर सकते हैं, जिसमें राज्य की वर्तमान स्थिति, शांति बहाली और सरकार गठन पर चर्चा होने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक बीजेपी कल सरकार बनाने का दावा पेश कर सकती है। परसों शपथ ग्रहण होने की संभावना भी व्यक्त की जा रही है। इंफाल से रवाना होने से पहले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष शारदा देवी ने कहा कि सभी एनडीए विधायकों को केंद्र नेतृत्व ने चर्चा के लिए बुलाया है और उम्मीद है कि सरकार गठन से जुड़े विषय पर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा। वहीं, बीरेन सिंह ने कहा कि बैठक का कोई औपचारिक एजेंडा साझा नहीं किया गया है, लेकिन सभी सहयोगी दलों के विधायकों को बुलाया जाना अच्छे संकेत देता है। गौरतलब है कि मणिपुर में जातीय हिंसा के लंबे दौर के बाद 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था, जो 12 फरवरी 2026 को समाप्त होने वाला है। 60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा को फिलहाल निलंबित अवस्था में रखा गया है, जबकि भाजपा के पास 37 विधायक हैं। उसके एनडीए सहयोगी दलों में एनपीपी के छह, एनपीएफ के पांच विधायक हैं और तीन निर्दलीय विधायक भी भाजपा समर्थित गठबंधन का हिस्सा हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केंद्र सरकार और भाजपा नेतृत्व राष्ट्रपति शासन समाप्त होने से पहले राज्य में निर्वाचित सरकार की वापसी की दिशा में निर्णायक कदम उठा सकते हैं। ( बांग्लादेश बोर्डर से अशोक झा की रिपोर्ट )
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