पड़ोसी राष्ट्र बांग्लादेश के बाद अब नेपाल में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा भड़क गई है। नेपाल में एक बार फिर सांप्रदायिक तनाव की आग सुलग गई हैं। इस बार हिंसा की चिंगारी एक सोशल मीडिया वीडियो से भड़की, जिसने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया। सड़कों पर प्रदर्शन, आगजनी और टकराव से हिंसा ज्यादा भड़क गई। हालात बेकाबू होते देख सरकार और स्थानीय प्रशासन को कर्फ्यू जैसे सख्त कदम उठाने पड़े। भारत से सटे बीरगंज शहर में हालात सबसे ज्यादा तनावपूर्ण बने हुए हैं, जिस वजह से वहां कर्फ्यू लगाया गया है। बीरगंज और आस-पास के इलाकों में तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए, भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने सीमा को पूरी तरह से सील कर दिया है। भारतीय सुरक्षा बलों ने इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर, सीमा पर आम नागरिकों की आवाजाही पूरी तरह से रोक दी है।भारत और नेपाल को जोड़ने वाले मैत्री पुल पर खास निगरानी रखी जा रही है, जहां सीमा पार करने वाले हर व्यक्ति की अच्छी तरह से जांच की जा रही है. सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए सीमा पर डॉग स्क्वॉड टीम भी तैनात की गई है।बढ़ते प्रदर्शन को देखते हुए भारत नेपाल बॉर्डर को सील किया गया है।सवाल उठता है कि कौन है जो हिंदुओं के खिलाफ इस प्रकार की साजिश रच रहा है। कौन है जो अफवाह फैलाकर सांप्रदायिकता की आग में पड़ोस को झोंक रहा है। हम आपको बता दें कि नेपाल के भारत से सटे सीमावर्ती शहर बीरगंज में इस समय हालात बेकाबू हो गये हैं। शहर के कई हिस्सों में तनाव, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं के बाद प्रशासन को कर्फ्यू लागू करना पड़ा है। हम आपको बता दें कि यह इलाका भारत नेपाल सीमा के बेहद नजदीक है, जिस कारण हालात की गंभीरता और बढ़ गयी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पूरे विवाद की शुरुआत एक सोशल मीडिया वीडियो से हुई, जो टिकटॉक पर तेजी से वायरल हुआ। इस वीडियो में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली सामग्री होने का आरोप लगाया गया, जिसके बाद स्थानीय समुदायों में भारी आक्रोश फैल गया। देखते ही देखते प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आये और मामला सांप्रदायिक तनाव में बदल गया। हम आपको बता दें कि हालात तब और बिगड़ गये जब कुछ इलाकों में धार्मिक स्थलों के साथ तोड़फोड़ की खबरें सामने आयीं। इसके बाद प्रदर्शन हिंसक हो गये। दुकानों को नुकसान पहुंचाया गया, टायर जलाये गये और मुख्य सड़कों को जाम कर दिया गया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें भी हुईं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने बीरगंज के संवेदनशील इलाकों में कर्फ्यू लागू कर दिया। पहले यह कर्फ्यू सीमित समय के लिये लगाया गया था, लेकिन हालात सामान्य न होने के कारण इसे बढ़ाना पड़ा। प्रशासन ने साफ किया कि कर्फ्यू के दौरान अनावश्यक आवाजाही पर सख्त कार्रवाई की जायेगी। हम आपको बता दें कि कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिये बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि अगर हिंसा दोबारा भड़की तो और कठोर कदम उठाये जा सकते हैं। जरूरी सेवाओं को छूट दी गयी है, लेकिन आम नागरिकों से घरों में रहने की अपील की गयी है। उधर, बीरगंज की स्थिति का असर भारत नेपाल सीमा पर भी साफ दिख रहा है। सीमा पर चौकसी बढ़ा दी गयी है और सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को लेकर सतर्क हैं। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच लगातार संपर्क बनाये रखा जा रहा है ताकि हालात नियंत्रण में रहें। देखा जाये तो भारत नेपाल सीमा से सटे बीरगंज में भड़की हिंसा उस गहरी सामाजिक बेचैनी का नतीजा है जो पिछले कुछ वर्षों से नेपाल के भीतर लगातार पकती रही है। एक वायरल सोशल मीडिया वीडियो से शुरू हुआ विवाद, मस्जिद में तोड़फोड़, सड़कों पर उग्र प्रदर्शन और अंततः कर्फ्यू तथा सीमा सील होने तक की नौबत यह दिखाती है कि नेपाल आज किस नाजुक मोड़ पर खड़ा है। नेपाल लंबे समय तक एक घोषित हिंदू राष्ट्र रहा है। राजशाही काल में धार्मिक पहचान स्पष्ट थी, लेकिन सामाजिक संतुलन अपेक्षाकृत स्थिर था। मुसलमान, बौद्ध और अन्य समुदाय हिंदू बहुल समाज के साथ रहते आये और कभी बड़े पैमाने पर टकराव की घटना नहीं हुई। लेकिन राजशाही के अंत और धर्मनिरपेक्ष गणराज्य बनने के बाद नेपाल की पहचान एक तरह से अधर में लटक गयी। बीरगंज का मामला बताता है कि धार्मिक भावनाएं अब तर्क से नहीं, उन्माद से संचालित हो रही हैं। सोशल मीडिया संवाद का माध्यम बनने की बजाय भीड़ को भड़काने का हथियार बन गया है। अफवाहें सत्य से ज्यादा तेज दौड़ती हैं और नफरत शांति को रौंदती चली जाती है। यह भी समझना जरूरी है कि यह आग अचानक नहीं लगी। नेपाल पिछले कुछ वर्षों से राजनीतिक अस्थिरता, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और पहचान की राजनीति से जूझ रहा है। जब शासन कमजोर होता है, जब जनता का भरोसा टूटता है, तब समाज के भीतर छिपी दरारें उभर कर हिंसा का रूप ले लेती हैं। धर्म ऐसे समय में सबसे आसान औजार बन जाता है। नेताओं के लिये भी और उकसाने वालों के लिये भी। बीरगंज में यही हुआ।
भारत के लिये यह स्थिति इसलिए भी चिंता का विषय है क्योंकि सीमा के आर पार जीवन एक दूसरे से जुड़ा हुआ है। व्यापार, रोजगार, रिश्तेदारी और रोजमर्रा की आवाजाही इस क्षेत्र को संवेदनशील बनाती है। नेपाल में भड़की हर चिंगारी भारत की सीमा तक असर दिखाती है। ( नेपाल बोर्डर से अशोक झा की रिपोर्ट )
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