- अमेरिका से पहले चीन और पाकिस्तान के भी जमात से करीबी बनाने की खबरें आ चुकी हैं
बांग्लादेश में आम चुनाव (12 फरवरी) की तारीख नजदीक आते ही वहां सियासी हलचल बढ़ गई है। खासकर इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के प्रदर्शन पर सबकी नजरे हैं। अभी वहां जो माहौल है, इससे ऐसा लग रहा है कि जमात-ए-इस्लामी बिग प्लेयर बन सकती है। ऐसे में अमेरिका ने भी अपने पत्ते खोलने शुरू कर दिए हैं।
अमेरिकी अखबार 'द वॉशिंगटन पोस्ट' की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ढाका स्थित अमेरिकी डिप्लोमैट जमात के संपर्क में है।उस राजनयिक ने बांग्लादेश में हो रहे बदलाव का जिक्र करते हुए जमात के साथ संबंध बनाने की बात कही। अमेरिका बांग्लादेश की जमात-ए-इस्लामी पार्टी के साथ अपने संबंधों को बेहतर करने पर ज़ोर दे रहा है। उसे उम्मीद है कि फ़रवरी महीने में हो रहे आम चुनावों में जमात सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभर सकती है। इस खबर के बाद भारत के साथ अमेरिकी संबंधों में और तनाव आ सकता है। बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना 2024 में बड़े विरोध प्रदर्शनों में सत्ता से हटाए जाने के बाद से निर्वासन में रह रही हैं। खास बात है कि अमेरिका से पहले चीन और पाकिस्तान के भी जमात से करीबी बनाने की खबरें आ चुकी हैं। ऐसे में पड़ोसी देश से भारत के लिए एक के बाद टेंशन दस्तक दे रही है।अमेरिका बढ़ा रहा जमात से नजदीकी: अमेरिकी डिप्लोमैट एक समय बैन किए गए कट्टरपंथी ग्रुप के साथ अपनी बातचीत बढ़ाना चाहते हैं। खबर में 1 दिसंबर की एक मीटिंग की ऑडियो रिकॉर्डिंग का हवाला दिया गया है। ढाका में मौजूद एक अमेरिकी डिप्लोमैट ने कुछ बांग्लादेशी पत्रकारों के साथ उस बंद कमरे की मीटिंग में कहा कि देश 'इस्लामिक' हो गया है। साथ ही, भविष्यवाणी की कि जमात 12 फरवरी के चुनाव में 'पहले से कहीं बेहतर प्रदर्शन करेगी'।वाशिंगटन पोस्ट ने डिप्लोमैट की पहचान गुप्त रखी है। अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि हम चाहते हैं कि वे हमारे दोस्त बनें। रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्हें पत्रकारों से पार्टी के प्रभावशाली छात्र विंग को अधिक एयरटाइम देने का अनुरोध करते हुए सुना जा सकता है। जहां तक इस डर की बात है कि जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश को सख्त इस्लामी कानून के रास्ते पर ले जा सकती है, तो अमेरिकी डिप्लोमैट ने कथित तौर पर कहा कि वाशिंगटन के पास ऐसा दबाव है जिसका वह इस्तेमाल कर सकता है। ये कदम उन पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगा देना है।
चीन-पाकिस्तान भी चल रहे चाल : चीन और पाकिस्तान का झुकाव जमात-ए-इस्लामी की ओर बना हुआ है। इसको लेकर क्षेत्रीय राजनीति में कई सवाल खड़े हो रहे हैं। चीन और पाकिस्तान दोनों ही इस बात से वाकिफ हैं कि चुनावों में बीएनपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर सकती है, जबकि जमात-ए-इस्लामी दूसरे स्थान पर रहकर विपक्ष की भूमिका निभाएगी। इसके बावजूद दोनों देश जमात के साथ लगातार संपर्क और संवाद बनाए हुए हैं। विदेश मामलों के जानकारों के अनुसार, चीन और पाकिस्तान जमात को भारत के प्रभाव के खिलाफ एक महत्वपूर्ण संतुलनकारी शक्ति के तौर पर देखते हैं। पाकिस्तानी अधिकारी विभिन्न स्तरों पर जमात के नेताओं के संपर्क में हैं। बांग्लादेश में चीन के राजदूत याओ वेन ने जमात-ए-इस्लामी के अमीर शफीकुर रहमान से मुलाकात की थी। जमात से करीबी भारत के लिए टेंशन क्यों?
ओपिनियन पोल के अनुसार बांग्लादेश में बीएनपी के सत्ता में आने की बात कही जा रही है। ऐसे में सत्ता में न आने के बावजूद जमात की राजनीतिक और सामाजिक प्रासंगिकता बनी रहेगी। जमात पर बांग्लादेश के इतिहास में कई बार प्रतिबंध लग चुका है। इसके बावजूद पार्टी के पास मजबूत कैडर, व्यापक संगठनात्मक ढांचा और कई संस्थानों में प्रभाव है। जमात-ए-इस्लामी की पाकिस्तान से करीबी जगजाहिर है।
दूसरी तरफ, जमात के पास सड़कों पर बड़ी संख्या में लोगों को उतारने की क्षमता भी है, जिसका इस्तेमाल भारत के हितों को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा सकता है। अमेरिका और चीन के साथ ही पाकिस्तान चुनाव के बाद भी जमात के जरिए विरोध-प्रदर्शन और राजनीतिक अस्थिरता को बढ़ावा देने की रणनीति अपना सकते हैं।अस्थिर बांग्लादेश भारत के लिए बड़ी चुनौती: भारत के लिए एक अस्थिर बांग्लादेश गंभीर चुनौती बन सकता है, खासकर सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा हालात के लिहाज से। इससे घुसपैठ और आतंकी गतिविधियों का खतरा बढ़ सकता है। इससे सुरक्षा एजेंसियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। दूसरी तरफ, खुफिया एजेंसियों का मानना है कि जब भी भारत बांग्लादेश में निवेश करेगा या द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने की कोशिश करेगा, तब जमात को अशांति फैलाने के लिए आगे किया जा सकता है। जमात का छात्र संगठनों पर प्रभाव, साथ ही सेना और पुलिस में उसके समर्थकों की मौजूदगी, भारत-विरोधी ताकतों के लिए मददगार साबित हो सकती है। ( बांग्लादेश बोर्डर से अशोक झा की रिपोर्ट )
#बांग्लादेश #अमेरिका
दुनियाभर के घुमक्कड़ पत्रकारों का एक मंच है,आप विश्व की तमाम घटनाओं को कवरेज करने वाले खबरनवीसों के अनुभव को पढ़ सकेंगे
https://www.roamingjournalist.com/