- कांग्रेस एकला चलो के दम लड़ सकती है चुनाव या वामपंथी का मिलेगा साथ
- यह दल-बदल नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीति में सियासी संतुलन बदलने वाला कदम
बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) छोड़ मौसम नूर कांग्रेस में शामिल हो गई हैं। इस पर ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। टीएमसी ने कहा है कि कांग्रेस ने इंडिया ब्लॉक के साथियों के घर में सेंधमारी की है। अगर उनके घर में इसी तरह कोई सेंधमारी करे, तो उन्हें कैसा लगेगा।
जो इंडिया ब्लॉक से परहेज करते थे, वे आज उसकी बात कर रहे – जयराम रमेश
तृणमूल कांग्रेस की इस प्रतिक्रिया पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने नपी-तुली और सधी हुई प्रतिक्रिया दी।पत्रकारों के सवाल के जवाब में जयराम रमेश ने कहा कि कल तक जो लोग इंडिया ब्लॉक का नाम तक लेने से परहेज करते थे, वे आज इंडिया ब्लॉक की बात कर रहे हैं, यह अच्छी बात है. 2009 से 2019 तक कांग्रेस की सांसद थीं मौसम नूर
मौसम नूर के कांग्रेस में शामिल होने के बाद नयी दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए जयराम रमेश ने एक सवाल के जवाब में ये बातें कहीं. वर्ष 2009 से 2019 तक कांग्रेस पार्टी से मालदा से 2 बार लोकसभा सदस्य रहीं, मौसम नूर ने कहा है कि वह सोमवार को राज्यसभा से इस्तीफा दे देंगी।उन्होंने तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है।
मालदा से विधानसभा चुनाव लड़ सकतीं हैं मौसम नूर
मौसम नूर शनिवार को कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी नेताओं जयराम रमेश, पार्टी महासचिव और पश्चिम बंगाल प्रभारी गुलाम अहमद मीर तथा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार की उपस्थिति में कांग्रेस में शामिल हुईं। नूर का राज्यसभा का कार्यकाल इसी साल अप्रैल में समाप्त हो रहा है।उनके पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव मालदा से लड़ने की संभावना है।लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए उनकी यह घर वापसी कांग्रेस के लिए बंगाल से आई बड़ी खुशखबरी मानी जा रही है।
2026 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मौसम नूर का कांग्रेस में शामिल होना सिर्फ एक दल-बदल नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीति में सियासी संतुलन बदलने वाला कदम माना जा रहा है। मालदा की प्रभावशाली खान चौधरी परिवार से आने वाली मौसम नूर की वापसी से कांग्रेस को संगठनात्मक मजबूती के साथ-साथ उत्तर बंगाल और मुस्लिम बहुल इलाकों में नया संबल मिला है।
क्या है पूरा मामला?: तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद मौसम बेनजीर नूर शनिवार को दिल्ली स्थित AICC मुख्यालय पहुंचीं, जहां कांग्रेस नेतृत्व की मौजूदगी में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस मौके पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुभंकर सरकार भी मौजूद रहे. कांग्रेस में शामिल होते ही मौसम नूर का जोरदार स्वागत किया गया और इसे पार्टी के लिए बंगाल ब्रेकथ्रू बताया गया। मौसम नूर का राज्यसभा कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त होना है। लेकिन इससे पहले कांग्रेस में उनकी एंट्री को चुनावी रणनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। उनकी वापसी से कांग्रेस ने साफ संकेत दे दिया है कि वह बंगाल में दोबारा सियासी जमीन मजबूत करने के मूड में है।
क्यों अहम है मौसम नूर की कांग्रेस वापसी?: मौसम नूर का नाम मालदा की राजनीति में दशकों से असरदार रहा है. वह दिवंगत दिग्गज नेता गनी खान चौधरी की भतीजी हैं, जिनका उत्तर बंगाल में गहरा प्रभाव रहा है. कांग्रेस में उनकी वापसी से पार्टी को पारंपरिक मुस्लिम वोट बैंक को फिर से साधने का मौका मिला है। मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर जैसे इलाकों में कांग्रेस कभी मजबूत स्थिति में थी। समय के साथ टीएमसी और बीजेपी के उभार से कांग्रेस कमजोर पड़ी, लेकिन मौसम नूर की वापसी से इन क्षेत्रों में पार्टी को नई धार मिलने की उम्मीद है।टीएमसी से दूरी की वजह क्या रही?: सूत्रों के मुताबिक मौसम नूर लंबे समय से टीएमसी में खुद को हाशिए पर महसूस कर रही थीं. 2019 में कांग्रेस छोड़कर टीएमसी जॉइन करने के बाद उन्हें जिला अध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन बाद में यह जिम्मेदारी उनसे छीन ली गई. पार्टी के कार्यक्रमों में उनकी भूमिका सीमित होती चली गई और निर्णय प्रक्रिया से भी वह धीरे-धीरे बाहर होती गईं। यही असंतोष उनकी कांग्रेस वापसी की सबसे बड़ी वजह बना।।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि टीएमसी में उन्हें वह सम्मान और प्रभाव नहीं मिल पाया, जिसकी उन्हें उम्मीद थी।
कैसे हुई थी TMC में एंट्री?: मौसम नूर ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से की थी। 2009 और 2014 में वह मालदा उत्तर से कांग्रेस की लोकसभा सांसद चुनी गईं।
2011 में पश्चिम बंगाल युवा कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं। 28 जनवरी 2019 को ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी की मौजूदगी में टीएमसी जॉइन की। 2019 लोकसभा चुनाव टीएमसी टिकट पर लड़ा, लेकिन हार गईं। 2020 में TMC ने उन्हें राज्यसभा भेजा।अब 2026 से पहले उनकी कांग्रेस में वापसी ने सियासी समीकरण बदल दिए हैं।बंगाल की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर?: मौसम नूर की कांग्रेस में एंट्री से बंगाल की राजनीति में कई स्तरों पर असर पड़ सकता है। उत्तर बंगाल में कांग्रेस को नया चेहरा और नई ऊर्जा मिलेगी.
मुस्लिम बहुल इलाकों में पार्टी की पकड़ मजबूत होगी।
वर्तमान में बंगाल की इकलौती कांग्रेस सांसद ईशा खान चौधरी भी इसी परिवार से हैं। TMC को मालदा और आसपास के जिलों में झटका लग सकता है। बीजेपी और टीएमसी के बीच फंसी कांग्रेस को तीसरा मजबूत विकल्प बनने का मौका मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे 2026 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस-लेफ्ट गठबंधन को रणनीतिक बढ़त मिल सकती है आगे क्या बदलेंगे सियासी समीकरण?: मौसम नूर की घर वापसी ने साफ कर दिया है कि बंगाल की राजनीति में आने वाले दिनों में हलचल और तेज होगी। कांग्रेस के लिए यह संगठन, नेतृत्व और चुनावी गणित तीनों स्तरों पर बड़ी मजबूती है। जबकि टीएमसी को उत्तर बंगाल में अपनी रणनीति दोबारा तय करनी पड़ सकती है। ( बंगाल से अशोक झा की रिपोर्ट )
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