भारत और बांग्लादेश सीमा पर चिंता बढ़ती जा रही है। एक तरफ चुनाव आयोग कुछ राज्यों से अवैध बांग्लादेशियों को बाहर निकालने की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी तरफ बांग्लादेश से भारत में अवैध घुसपैठियों की संख्या भी बढ़ रही है। भारत-बांग्लादेश सीमा के कई हिस्सों में बांग्लादेशी घुसपैठिए बिना किसी रोक-टोक के भारत में घुस रहे हैं। अब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक अवैध बांग्लादेशी भारत में घुस रहा है। यह बात और भी चिंताजनक है कि उसे भारतीय सेना या बीएसएफ समेत किसी भी सुरक्षा बल से कोई चुनौती नहीं मिली।
वायरल वीडियो में क्या है?: कहा जा रहा है कि यह वीडियो भारत-बांग्लादेश की बाड़ वाली सीमा के पास का है। वीडियो में एक युवक बांग्लादेश की तरफ से आकर कांटेदार तार की बाड़ पर चढ़ जाता है। भारत की तरफ खड़ा एक व्यक्ति उस युवक का वीडियो बना रहा है। युवक ऊपर चढ़कर फिल्मी स्टाइल में पोज देता है और फिर बाड़ के ऊपर से भारत में कूद जाता है। वीडियो में भारत-बांग्लादेश की बाड़ वाली सीमा को दिखाया गया है, जहां कोई सुरक्षा बल मौजूद नहीं है। बताया गया है कि सिर्फ दो लोग ही पूरी सीमा पर हैं और वे बिना किसी डर के अंदर घुस आए।भारत-बांग्लादेश सीमा से सुरक्षा की समस्या: जैसे भारत-पाकिस्तान सीमा से आतंकवादी अवैध रूप से घुसपैठ करते हैं, वैसे ही भारत-बांग्लादेश सीमा से बांग्लादेशी अवैध रूप से घुस रहे हैं। बाद में वे देश के सभी हिस्सों में अलग-अलग नामों से बस जाते हैं। उन्हें भारत में नकली आधार कार्ड, राशन कार्ड समेत कई फर्जी दस्तावेज मुहैया कराए जाते हैं। भारत-बांग्लादेश सीमा देश की सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। इस सीमा के जरिए न केवल अवैध घुसपैठिए, बल्कि ड्रग्स, अवैध तस्करी और हथियारों की भी तस्करी हो रही है।वीडियो वायरल होने के बाद बढ़ा गुस्सा: एक युवक के खुलेआम भारत में अवैध रूप से घुसने का वीडियो वायरल होने के बाद कई लोगों ने चिंता जताई है। ऐसी बातें सुनने में आ रही हैं कि भारत में 1 करोड़ से ज्यादा अवैध बांग्लादेशी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अकेले कर्नाटक में, जिसमें बेंगलुरु भी शामिल है, 5 लाख से ज्यादा अवैध बांग्लादेशी हैं। लोगों ने मांग की है कि सुरक्षा बलों को इस सीमा मामले में ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए और हर अवैध घुसपैठिए की पहचान कर उसे देश से बाहर निकालना चाहिए।
कई राज्यों में बांग्लादेशी घुसपैठियों के आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के मामलों ने चिंता को और बढ़ा दिया है। वर्षों से भारत-बांग्लादेश सीमा पर यह अवैध गतिविधि जारी है और घुसपैठ का सबसे बड़ा रास्ता पश्चिम बंगाल माना जाता है। यहां सक्रिय बड़े गैंग बांग्लादेश से लोगों को भारत लाने, फर्जी दस्तावेज़ तैयार कराने और उन्हें देश के विभिन्न शहरों में बसाने तक की पूरी व्यवस्था संभालते हैं।
कई हिस्सों में बंटे घुसपैठ कराने वाले घुसपैठ कराने वाले ये गैंग कई चरणों में विभाजित होते हैं। पहला नेटवर्क बांग्लादेश में ही लोगों को चिन्हित करता है और उन्हें सीमा पार कराता है। दूसरा नेटवर्क भारतीय सीमा के बाद उन्हें रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड तक पहुंचाता है। तीसरा नेटवर्क इन्हें कोलकाता या अन्य शहरों से ट्रेनों के माध्यम से यूपी, दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे राज्यों तक भेज देता है। चौथा हिस्सा झुग्गियों में रहने, खाने और छोटे-मोटे काम का इंतज़ाम करता है। बाद में फर्जी आधार कार्ड, वोटर आईडी और अन्य कागजात बनवाकर उन्हें आम नागरिक की तरह स्थापित कर दिया जाता है। इस पूरे अवैध खेल का रेट कार्ड भी तय है—पहाड़ी क्षेत्रों से घुसपैठ कराने के 7-8 हजार रुपये, पानी वाले रास्तों से 3-4 हजार रुपये, समतल जमीन से 12-15 हजार रुपये, जबकि फर्जी कागजात के लिए 2 हजार रुपये और नौकरी दिलाने के लिए 5-7 हजार रुपये वसूले जाते हैं।
ऐसे होती है घुसपैठ बांग्लादेश सीमा की कुल लंबाई 4096.7 किलोमीटर है, जिसमें से 3232.7 किलोमीटर पर बाड़ लग चुकी है। लेकिन जहां नदी-नाले हैं या भूमि अधिग्रहण नहीं हुआ, वहां से घुसपैठ का बड़ा खतरा बना रहता है। पश्चिम बंगाल में करीब 112 किलोमीटर इलाका ऐसा है जहां फेंसिंग संभव नहीं है, और यही हिस्सा अवैध प्रवेश का प्रमुख रूट है। असम, मेघालय और त्रिपुरा में भी अधिकांश हिस्सों पर फेंसिंग हो चुकी है, लेकिन प्राकृतिक बाधाओं वाले क्षेत्र घुसपैठ के लिए लगातार इस्तेमाल किए जाते हैं।
डेमोग्राफी में हुआ बड़ा बदलाव अवैध घुसपैठ के चलते कई क्षेत्रों की जनसांख्यिकी में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। बांग्लादेश से आने वाले घुसपैठिए अक्सर मालदा, मुर्शिदाबाद, 24 परगना और दिनेशपुर के रास्ते प्रवेश कर मुस्लिम-बहुल क्षेत्रों में बस जाते हैं। उदाहरण के तौर पर, मुर्शिदाबाद जिले में 1961 में हिंदू आबादी 44.1% थी, जो 2011 की जनगणना में घटकर 33.2% पर पहुंच गई। वहीं मुसलमानों की आबादी 55.9% से बढ़कर 66.3% हो गई। बंगाल के कई जिलों में इसी तरह के बदलाव दर्ज किए गए हैं, जो प्रशासनिक और सुरक्षा दृष्टि से गंभीर चिंता का कारण हैं। इसी कारण कई राज्यों में अब अवैध घुसपैठियों के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चल रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में क्या कर रही सरकार उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू कर दिया है। पुलिस टीमें टॉर्च लेकर रात में बस्तियों में जाकर दस्तक दे रही हैं और घर-घर दस्तावेज़ों की जांच की जा रही है। कई जिलों में घुसपैठियों में भगदड़ मच गई है। गोरखपुर के स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले 6-7 दिनों में कई झुग्गियां खाली हो गई हैं। वाराणसी में पुलिस ने 500 संदिग्ध व्यक्तियों की सूची तैयार की है। गोरखपुर में डिटेंशन सेंटर भी तैयार है, जहां बेड और कमरे नंबर के साथ चिन्हित किए गए हैं। अनुमान है कि यूपी में लगभग 10 लाख बांग्लादेशी घुसपैठिए मौजूद हो सकते हैं। माना जा रहा है कि SIR की प्रक्रिया पूरी होते ही योगी सरकार की टीमें प्रत्येक घर जाकर दस्तावेज़ों की जांच करेंगी और अवैध रूप से रह रहे लोगों को डिटेंशन सेंटर भेजा जाएगा। ( बांग्लादेश बोर्डर से अशोक झा की रिपोर्ट )
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