मौलाना महमूद मदनी के विवादित बयान, जिसने देशभर में राजनीति गरमा दी है। मौलाना मदनी के बयान पर सिलीगुड़ी के कई धार्मिक और सामाजिक संगठन से जुड़े व्यवसाई और विद्यार्थी परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारी सह कार्यकर्ता सीताराम डालमिया ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे "भड़काऊ" और "देश को बाँटने वाला" बयान बताया है। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान देने वालों को अपराधियों की श्रेणी में रखा जाना चाहिए। अगर वह धर्मगुरु है और ऐसा बयान देते है तो उनका स्थान जेल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत मुसलमानों के लिए दुनिया का सबसे सुरक्षित देश है। डालमिया ने कहा कि भारत की भूमि पूरे विश्व में मुसलमानों के लिए सबसे सुरक्षित स्थान है। भारत के मुसलमानों के सामने प्रेरणा के लिए डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसी महान शख्सियत मौजूद है, जिन्हें एक सच्चे आइकॉन के रूप में देखा जाना चाहिए। मदनी जैसे लोग देश के ‘सफेदपोश आतंक’ और सांप्रदायिक साजिश रचने वाले है। सीताराम डालमिया ने मौलाना मदनी के बयान को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी। कहा कि ऐसे बयान समाज में सांप्रदायिक दंगा भड़काने के उद्देश्य से दिए गए हैं। उन्होंने जनता से “सफेदपोश आतंक के सरगनाओं” की साजिश से सावधान रहने का आग्रह किया। नकवी ने कहा कि ऐसे लोग न तो मानवता के हितैषी हैं, न देश के हितैषी हैं, न ही किसी धर्म के हितैषी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मदनी का बयान देश और उसके सम्मान के प्रति उनकी विकृत मानसिकता को दर्शाता है, और उनकी सांप्रदायिक साजिश वाली सोच का उद्देश्य पूरी तरह से समाज में विभाजन और संघर्ष पैदा करना है। मदनी ने यह दावा किया कि एक समुदाय को कानूनी तौर पर कमजोर किया जा रहा है। देश में कुछ लोग हैं, जो जिस थाली में खाते हैं, उसी में छेद करते हैं। ऐसे बयान देने वाले लोग अपने ही समुदाय की छवि खराब करते हैं। महमूद मदनी के बयान पर उन्होंने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'ये सभी बयान भारत के राष्ट्र, धर्म, संस्कृति, न्याय व्यवस्था, शासन और प्रशासन के लिए एक गंभीर चुनौती हैं। वे अपने ही मुस्लिम समुदाय के युवाओं और कट्टर मुस्लिम कट्टरपंथियों को जिहाद के नाम पर भड़का रहे हैं। उन्होंने कहा 'महमूद मदनी को बताना चाहिए कि दिल्ली ब्लास्ट में शामिल डॉक्टर उमर पर कौन-सा अन्याय हुआ। जितने भी आतंकवादी भारत और भारत के बाहर पकड़े गए हैं, क्या उन सभी के साथ जुर्म हुआ? महमूद मदनी सीधे कहें कि वे आतंकवादियों के साथ खड़े हैं। उन्होंने मांग उठाई कि महमूद मदनी के खिलाफ शासन-प्रशासन को कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने बंगाल के मुस्लिम समुदाय के लोगों से अपील करते हुए कहा कि उन्हें ऐसे कट्टरपंथी मौलानाओं से दूरी बना लेनी चाहिए, क्योंकि यही एक दिन उन्हें आरडीएक्स बांधकर ब्लास्ट करने के लिए मजबूर कर देंगे। डालमिया ने कहा कि ऐसे लोग चाहते हैं कि भारत एक इस्लामिक देश बने। आज देश में कुछ ऐसी ताकतें हैं जिनके बयान बांटने वाले हैं, जबकि देश को एक करने वाली खबरें भी हैं (जैसे कि हाल ही में जारी हुई ऐतिहासिक GDP दर)। उन्होंने मदनी के बयान पर गहरी आपत्ति जताई। उन्होंने इसे गैर-जिम्मेदाराना बयान बताते हुए कहा कि हमने देखा है कि कैसे जिहाद के नाम पर कुछ लोगों ने भारत और बाहर आतंकवाद फैलाया है।
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये मौलाना महमूद मदनी हैं कौन? जिनके एक बयान से इतना बवाल हो गया है। चलिए आपको बताते हैं कि आखिर मौलाना महमूद मदनी हैं कौन? मौजूदा समय में मौलाना महमूद मदनी जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष हैं। उनका जन्म वर्ष 1964 में हुआ था। मदनी को एक प्रतिष्ठित इस्लामी विद्वान होने के साथ-साथ एक प्रभावशाली धर्मगुरु भी हैं। साथ ही साथ वो राजनीतिक-सामाजिक स्तर पर भी काफी सक्रिय हैं। अगर बात मदनी के परिवार की जाए तो उनका परिवार मुस्लिम समाज में सुधारवादी विचारों और धार्मिक नेतृत्व के लिए जाना जाता है। मदनी के दादा, हुसैन अहमद मदनी, भारत के प्रमुख इस्लामिक विद्वानों में से एक थे। मदनी ने अपने बयान में क्या कुछ कहा था: मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि इस्लाम के दुश्मनों ने 'जिहाद' शब्द को बदनाम किया है। लव-जिहाद, लैंड-जिहाद और थूक-जिहाद जैसे शब्दों को मुसलमानों की तौहीन करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने अपने बयान में कहा है कि जिहाद केवल हिंसा नहीं है यह पवित्र कर्तव्य है. जहां अन्याय हो, जिहाद होना चाहिए। जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा। मदनी ने तो सुप्रीम कोर्ट पर भी सवाल खड़े कर दिए। उनके इस बयान के बाद अब सियासत भी गरमाने लगी है। ( बंगाल से अशोक झा की रिपोर्ट )
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