एक ऐसा योद्धा जिसने ना बंदूक से लड़ाई लड़ी न ही किताबों से, लिखी क्रांति अपने हौसलों से

एक ऐसा योद्धा जिसने ना बंदूक से लड़ाई लड़ी न ही किताबों से, लिखी क्रांति अपने हौसलों से

- जिन्होंने 25 साल की उम्र में कर दिए थे अंग्रेज़ों के दांत खट्टे आदिवासी संस्कृति, स्वाभिमान और स्वाधीनता …

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