जहाँ कभी सुरक्षा शिविर था, आज वहाँ 150 आदिवासी विद्यार्थी पढ़ रहे हैं

जहाँ कभी सुरक्षा शिविर था, आज वहाँ 150 आदिवासी विद्यार्थी पढ़ रहे हैं

*जहाँ कभी सुरक्षा शिविर था, आज वहीं संवर रहा है आदिवासी बच्चों का भविष्य *सुरक्षा शिविर से छात्रावास तक: बस…

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