- मणिपुर के कांगपोकपी में हिंसक प्रदर्शन, नेशनल हाई-वे खोदा, सुरक्षाबलों पर पथराव-आगजनी
बांग्लादेश बोर्डर से अशोक झा: मणिपुर के कांगपोकपी में देर रात तनाव बढ़ गया। सुरक्षाबलों द्वारा छह लोगों को हिरासत में लिए जाने के बाद कुकी समुदाय के लोग भडक़ गए। प्रदर्शनकारियों ने सडक़ों पर आगजनी के साथ सुरक्षाबलों के वाहनों पर पथराव किया। कई जगह सडक़ें खोद दी गईं। सुरक्षाबलों ने आंसू गैस के गोले दागकर प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा। हिरासत में लिए गए लोगों को छोडऩे के बाद प्रदर्शनकारी शांत हुए। जानकारी के अनुसार, सुरक्षाबलों ने शनिवार शाम कांगपोकपी जिले के खोलेप गांव से छह लोगों को हिरासत में लिया था। उन पर हाल में हुई हिंसक वारदातों में शामिल सशस्त्र संगठनों से जुड़े होने का संदेह था। रिपोर्ट के मुताबिक, CoBRA की CRPF यूनिट की एक टीम ने शनिवार को चावांगकिनिंग गांव के पास 6 लोगों को पकड़ा। स्थानीय लोगों के अनुसार, पकड़े गए लोगों के नाम सीलेट, मैंगलन, साथो, लेनलाल, गिन और चुचुंग हैं. इन सभी पर एक सशस्त्र उग्रवादी संगठन के कैडर होने का शक बताया गया है. गिरफ्तारी के बाद ही इलाके में विरोध शुरू हो गया.
इससे पहले 16 सितंबर को चावांगकिनिंग गांव में कम से कम 5 घरों को जला दिया गया था. सोर्स के मुताबिक, यह घटना उसी जिले में दो अलग-अलग हमलों में 6 लोगों की मौत के बाद हुई। मृतकों में एक दंपति भी शामिल था. इस घटना के बाद से इलाके में तनाव और बढ़ गया है। अब 6 लोगों की गिरफ्तारी के बाद सड़क पर विरोध ने हालात को और संवेदनशील बना दिया।
नगा-कुकी तनाव का पुराना असर: रिपोर्ट्स के मुताबिक, 7 फरवरी से नगा और कुकी समुदायों के बीच शुरू हुई झड़पों में दोनों पक्षों के करीब 30 लोगों की मौत हो चुकी है। 13 मई को कांगपोकपी और नोनी में दो अलग-अलग जगहों पर घात लगाकर किए गए हमलों में 4 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद 6 नागा लोगों के शव मिलने की घटना ने भी तनाव बढ़ाया था। इन लोगों को पकड़े जाने के बाद उनकी हत्या की गई थी। ऐसे घटनाक्रमों की वजह से कांगपोकपी और आसपास के इलाकों में माहौल पहले से ही तनावपूर्ण बना हुआ है।।शनिवार की गिरफ्तारी के बाद सड़क जाम, आगजनी और सुरक्षा बलों की गाड़ी को रोकने की कोशिश ने इस तनाव को फिर सामने ला दिया. फिलहाल सुरक्षा बल इलाके में स्थिति संभालने में जुटे हैं। ग्रामीणों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी फैलते ही कुकी समुदाय के लोग सडक़ों पर निकलने लगे। रात करीब दस बजे कांगपोकपी बाजार, मोटबुंग और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में लोग जुट गए और हिंसक प्रदर्शन शुरू कर दिया। तब से लगातार हिंसा जारी है। राष्ट्रीय राजमार्ग-दो (इंफाल से दीमापुर) पर जगह-जगह जाम लगाए जाने से बड़ी संख्या में वाहन फंस गए। हालात बिगडऩे पर अतिरिक्त बल मौके पर भेजे गए। इस पर प्रदर्शनकारियों ने जगह-जगह टायर जलाने के साथ सरकारी और सुरक्षाबलों के वाहनों पर पथराव किया। सुरक्षाबलों के वाहनों को रोकने के लिए भारी मशीनों से कई जगह सडक़ों पर खुदाई भी कर दी। आधी रात तक भारी बवाल के बाद सुरक्षाबलों ने आंसू गैस के गोले दागकर प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा। बाद में अधिकारियों से बातचीत के दौरान ग्रामीणों ने दावा किया कि सुरक्षाबलों ने छह ग्रामीणों को बिना कोई कारण बताए हिरासत में लिया है।
मणिपुर में लगातार हिंसा के बीच अब कोबरा कमांडो संभाल रही कमान : मणिपुर में हिंसा और कानून-व्यवस्था से जुड़ी घटनाओं के बीच उग्रवादी संगठनों की गतिविधियां केंद्रीय एजेंसियों की निगरानी में बनी हुई हैं।केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मणिपुर में जातीय हिंसा और उग्रवादी गतिविधियों से निपटने के लिए पहली बार सीआरपीएफ (CRPF) के विशिष्ट कोबरा (CoBRA - Commando Battalion for Resolute Action) कमांडो की दो बटालियन (लगभग 2,000 कमांडो) तैनात की हैं। सुरक्षा और प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, विभिन्न उग्रवादी समूहों और उनके कैडरों की गतिविधियों को लेकर केंद्रीय एजेंसियां स्थानीय खुफिया तंत्र के साथ लगातार सूचनाएं जुटा रही हैं। इन सूचनाओं के आधार पर संवेदनशील और सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा अभियानों को तेज किया जा सकता है।अधिकारियों के अनुसार, एनएससीएन (आईएम) समेत अन्य उग्रवादी संगठनों से जुड़े कैडरों की गतिविधियों को लेकर सुरक्षा एजेंसियों को लगातार इनपुट मिल रहे हैं। जमीनी स्तर पर तैनात सुरक्षा बलों के कमांडरों को हिंसक समूहों के खिलाफ कार्रवाई के लिए तैयार रहने को कहा गया है। अधिकारियों के मुताबिक, पहले सुरक्षा बलों का मुख्य जोर निवारक कार्रवाई और तनाव को नियंत्रित करने पर था, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए रणनीति में बदलाव किया जा रहा है।अभियानों को मजबूत करने के लिए कोबरा कमांडो बल के जवानों की भी तैनाती की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, इसका उद्देश्य संवेदनशील और दुर्गम इलाकों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई को मजबूत करना और उग्रवादी नेटवर्क की गतिविधियों पर अंकुश लगाना है। केंद्रीय और स्थानीय खुफिया एजेंसियों से उग्रवादी संगठनों की गतिविधियों, संभावित ठिकानों और हिंसा में उनकी कथित भूमिका से संबंधित अधिक से अधिक जानकारी जुटाने को कहा गया है।
अधिकारियों के मुताबिक, इन सूचनाओं का विश्लेषण कर संवेदनशील इलाकों की पहचान की जा रही है, जहां लक्षित सुरक्षा अभियान चलाने की जरूरत हो सकती है। उनका कहना है कि मणिपुर में सुरक्षा स्थिति अब भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
लंबे समय से जारी कुकी-मैतेई संघर्ष के बीच कुकी-नगा तनाव की संभावनाओं को भी सुरक्षा एजेंसियां एक अतिरिक्त चुनौती के रूप में देख रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, विभिन्न संगठनों से जुड़े कुछ कैडरों की हिंसा और कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली गतिविधियों में कथित संलिप्तता को लेकर जानकारी सामने आई है।हाल के दिनों में इंफाल पश्चिम, इंफाल पूर्व, बिष्णुपुर, थौबल और काकचिंग जिलों के संवेदनशील और सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा अभियान तेज किए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि इन अभियानों के दौरान अलग-अलग स्थानों से हथियार और विस्फोटक बरामद किए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, एनएससीएन (आईएम) से जुड़े कुछ लोगों को भी पकड़ा गया है।
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